सिर्फ हिंदुओं का ही नहीं, दीवाली सिख धर्म के लिए भी क्यों है इतनी खास? जानिए इसका रोचक इतिहास
दीवाली के दिन सिख धर्म में 'बंदी छोड़ दिवस' मनाया जाता है, जो गुरु हरगोविंद सिंह जी की मुगल कैद ...और पढ़ें

सिख दिवाली पर बंदी छोड़ दिवस क्यों मनाते हैं? (Picture Credits- AI Images)
HighLights
गुरु हरगोविंद सिंह की मुगल कैद से रिहाई का दिन।
52 हिंदू राजाओं को जहांगीर की कैद से मुक्ति मिली।
अमृतसर स्वर्ण मंदिर में दीयों से होती है भव्य सजावट।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली के दिन ही सिख धर्म में आस्था रखने वाले लोग 'बंदी छोड़ दिवस' मनाते हैं। दीवाली हिंदू धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसी दिन भगवान श्रीराम का अयोध्या में आगमन हुआ था।
हालांकि हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध और सिख धर्म में भी इस दिन कई घटनाएं घटित हुई थी। इसलिए दीवाली का पर्व न सिर्फ हिंदू धर्म से जुड़े लोगों के लिए खास माना जाता है, बल्कि अन्य धर्मों में भी इस दिन का महत्व है। इस साल दीवाली और बंदी छोड़ दिवस दोनों ही 8 नवंबर 2026, रविवार के दिन मनाया जाएगा।
सिख धर्म से जुड़े लोग दीवाली के पर्व पर बंदी छोड़ दिवस (Diwali Bandi Chhor Divas) मनाते हैं। इस दिन 6वें गुरु 'गुरु हरगोविंद सिंह जी' को मुगल राजा जहांगीर की कैद से आजादी मिली थी। सिर्फ एक ही यही घटना नहीं बल्कि दीवाली के मौके पर कई अन्य घटनाएं भी घटित हुई थी जो सिख धर्म से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत खास मानी जाती है।

बंदी छोड़ दिवस दिवस क्या है?
जब भारत में मुगल आए थे तभी से उन्होंने हिंदू व भारत में मौजूद अन्य धर्मों के लोगों का मारना और उनपर तरह-तरह के अत्याचार दिखाना शुरू कर दिया। मुगलों की दमनकारी नीति के खिलाफ न सिर्फ हिंदू राजा और धर्मगुरुओं ने आवाज उठाईं थी, बल्कि सिख समाज के गुरु भी मुगलों के इस रवैये के खिलाफ थे। उस समय भारत पर मुगल सम्राट जहांगीर का शासन था जिसने सारेआम हिंदुओं और सिखों के कत्लेआम को अंजाम दिया था।
जहांगीर उस दौरान सिख गुरु हरगोविंद के बढ़ते हुए प्रभाव से काफी चिंतिंत था तथा उन्हें ग्वालियर के किले में बंदी बना लिया था। उस किले में उनके साथ अन्य 52 हिंदू राजाओं को भी बंदी बनाया गया था। बताया जाता है कि ग्वालियर किले के कारावास में जब सिख गुरु हरगोविंद सिंह जी को बंदी बनाकर लाया गया तो सभी हिंदू राजाओं ने उनका बेहद आदर-सम्मान किया।
कुछ सालों तक गुरु हरगोविंद को उस कारावास में रखने के बाद जहांगीर ने उन्हें आजाद करने के घोषणा की लेकिन हरगोविंद सिंह जी ने यह शर्त रखी कि उनके साथ सभी 52 हिंदू राजाओं को रिहा किया जाए। आखिरकार जहांगीर ने उनकी शर्त मान ली तथा दीवाली के मौके पर गुरु हरगोविंद सिंह जी समेत सभी राजाओं को कारावास से रिहा कर दिया।
ग्वालियर के कारावास से बाहर आने के बाद गुरु हरगोविंद सिंह जी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर गए जहां उनके स्वागत में पूरे मंदिरों को दीयों से सजाया गया था। इसी घटना के बाद से इसे बंदी छोड़ दिवस (Bandi Chhor Divas) के रूप में मनाया जाने लगा। गुरु हरगोविंद जी के आजाद होने के उपलक्ष्य पर हर साल सिख धर्म से जुड़े लोग इस दिन को बेहद श्रद्धा और पवित्रता के साथ मनाते हैं।
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सिख और हिंदू धर्म में दीवाली
हिंदू धर्म की ही तरह सिख धर्म में भी लोग इस दिन मंदिर / गुरुद्वारे जाकर गुरु के दर्शन करते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं। इसके अलावा अपने सगे-संबंधी के घर जाकर उनके साथ खुशियां मनाते हैं।
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को इस दिन रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाता है। दीवाली के मौके पर स्वर्ण मंदिर में पूरे दिन कीर्तन चलता है व गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ भी किया जाता है। शाम में सिख धर्म से जुड़े लोग इस दिन घर व मोहल्लों को दीपक की रोशनी से रोशन करते हैं।
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