Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    किसी और के गर्भ से हुआ देवकी की सातवीं संतान का जन्म, ऐसे दिया था कंस को चकमा

    Updated: Tue, 04 Feb 2025 06:13 PM (IST)

    भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म देवकी के गर्भ से लिया लेकिन उनका लालन-पालन मां यशोदा द्वारा किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवकी की सातवीं संतान कौन थी जिसका जन्म देवकी नहीं बल्कि किसी और के गर्भ से हुआ। अगर नहीं तो चलिए जानते हैं इस अद्भुत कथा के बारे में।

    Hero Image
    Balram birth story किसने दिया देवकी की सातवीं संतान को जन्म?

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देवकी, कंस की चचेरी बहन थी, जिसका विवाह वासुदेव के साथ हुआ था। हालांकि कंस अपनी बहन से बहुत प्रेम करता था, लेकिन जब भविष्यवाणी हुई की देवकी की आठवीं संतान उसका काल बनेगी, तो उसने देवकी और वासुदेव को कालकोठरी में बंद कर दिया। कंस, देवकी के 6 पुत्रों को मौत के घाट उतारने में सफल हुआ, लेकिन वह देवकी की सातवीं और आठवीं संतान का कुछ नहीं बिगाड़ पाया, चलिए जानते हैं इसका कारण।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    वासुदेव ने दिया आश्वासन

    जब वासुदेव के साथ देवकी का विवाह हुआ तो, कंस बहुत प्रसन्न था। वह अपनी बहन और वासुदेव को रथ पर  ससुराल छोड़ने जा ही रहा था कि तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का काल बनेगी। यह सुनकर कंस आश्चर्य में पड़ गया।

    अपनी मृत्यु के डर से कंस, देवकी और वासुदेव को मार डालना चाहता था, लेकिन वासुदेव उसे आश्वासन दिया कि वह उसकी हर संतान का जन्म होते ही खुद कंस को सौंप देगा। इसके बाद भी कंस ने उन दोनों को कालकोठरी में बंद कर दिया।

    जब देवकी की पहली संतान का जन्म हुआ तो, वासुदेव उसे लेकर कंस के पास पंहुचे। लेकिन कंस ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि मुझे आपकी आठवीं संतान से खतरा है, ऐसे में इसे आप वापस ले जाएं। लेकिन नारद मुनि ने कंस से कहा कि विष्णु जी का अवतार देवकी के पहले गर्भ में भी हो सकता है और आठवां गर्भ में भी। नारद मुनि की बातों में आकर कंस ने एक-एक करके देवकी की सभी संतानों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी।

    यह भी पढ़ें - किसकी अवतार हैं श्रीकृष्ण की मां देवकी, भगवान विष्णु ने कई रूपों में लिया इनके गर्भ से जन्म

    इस तरह पड़ा संकर्षण नाम

    जब देवकी की सातवीं संतान पैदा होने वाली थी, तब महामाया ने देवकी के सातवें गर्भ को वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भाशय में स्थापित कर दिया। देवकी की सातवीं संतान और कोई नहीं बल्कि शेषनाग के रूप में स्वयं बलराम जी थे। गर्भ संकर्षण के कारण बलराम जी को संकर्षण नाम से भी जाना जाता है।

    यह भी पढ़ें - Banke Bihari Temple: बांके बिहारी मंदिर में रोजाना क्यों नहीं होती मंगला आरती? जानें इसके पीछे की वजह

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।