किसी और के गर्भ से हुआ देवकी की सातवीं संतान का जन्म, ऐसे दिया था कंस को चकमा
भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म देवकी के गर्भ से लिया लेकिन उनका लालन-पालन मां यशोदा द्वारा किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवकी की सातवीं संतान कौन थी जिसका जन्म देवकी नहीं बल्कि किसी और के गर्भ से हुआ। अगर नहीं तो चलिए जानते हैं इस अद्भुत कथा के बारे में।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देवकी, कंस की चचेरी बहन थी, जिसका विवाह वासुदेव के साथ हुआ था। हालांकि कंस अपनी बहन से बहुत प्रेम करता था, लेकिन जब भविष्यवाणी हुई की देवकी की आठवीं संतान उसका काल बनेगी, तो उसने देवकी और वासुदेव को कालकोठरी में बंद कर दिया। कंस, देवकी के 6 पुत्रों को मौत के घाट उतारने में सफल हुआ, लेकिन वह देवकी की सातवीं और आठवीं संतान का कुछ नहीं बिगाड़ पाया, चलिए जानते हैं इसका कारण।
वासुदेव ने दिया आश्वासन
जब वासुदेव के साथ देवकी का विवाह हुआ तो, कंस बहुत प्रसन्न था। वह अपनी बहन और वासुदेव को रथ पर ससुराल छोड़ने जा ही रहा था कि तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का काल बनेगी। यह सुनकर कंस आश्चर्य में पड़ गया।
अपनी मृत्यु के डर से कंस, देवकी और वासुदेव को मार डालना चाहता था, लेकिन वासुदेव उसे आश्वासन दिया कि वह उसकी हर संतान का जन्म होते ही खुद कंस को सौंप देगा। इसके बाद भी कंस ने उन दोनों को कालकोठरी में बंद कर दिया।
जब देवकी की पहली संतान का जन्म हुआ तो, वासुदेव उसे लेकर कंस के पास पंहुचे। लेकिन कंस ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि मुझे आपकी आठवीं संतान से खतरा है, ऐसे में इसे आप वापस ले जाएं। लेकिन नारद मुनि ने कंस से कहा कि विष्णु जी का अवतार देवकी के पहले गर्भ में भी हो सकता है और आठवां गर्भ में भी। नारद मुनि की बातों में आकर कंस ने एक-एक करके देवकी की सभी संतानों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी।
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इस तरह पड़ा संकर्षण नाम
जब देवकी की सातवीं संतान पैदा होने वाली थी, तब महामाया ने देवकी के सातवें गर्भ को वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भाशय में स्थापित कर दिया। देवकी की सातवीं संतान और कोई नहीं बल्कि शेषनाग के रूप में स्वयं बलराम जी थे। गर्भ संकर्षण के कारण बलराम जी को संकर्षण नाम से भी जाना जाता है।
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