Dahi Handi 2025: क्यों मनाई जाती है दही हांडी? बेहद रोचक है भगवान कृष्ण से जुड़ी यह कहानी
दही हांडी (Dahi Handi 2025) की इस रंगीन परंपरा में समर्पण साहस और एकता की शक्ति झलकती है जो हमें जीवन की कठिनाइयों को मिलजुल कर पार करने की प्रेरणा दे ...और पढ़ें

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दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। जब कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरे श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया जाता है, तो उसके अगले दिन दही हांडी का उत्सव जोश और उत्साह से भरपूर होता है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की खुशियों भरी यादों का जीवंत उत्सव है, जो हर भक्त के दिल को प्रेम और भक्ति की मधुर भावना से भर देता है।
कृष्ण की शरारतें और मटकी का महत्व
इस पर्व की पृष्ठभूमि में छिपी है वह प्यारी कहानी, जब बालकृष्ण ने मटकी से दही और माखन चुराकर अपने प्रेम और चंचलता का परिचय दिया था। दही हांडी हमें सिखाती है कि जीवन की चुनौतियों में भी जब हम एक साथ होते हैं, तो कोई भी बाधा हमारी राह में टिक नहीं सकती।
दही हांडी में युवा ‘गोविंदाओं’ की टोली एक-दूसरे के कंधों पर भरोसा करते हुए ऊंचे मानव पिरामिड बनाती है, जैसे भगवान कृष्ण की लीला में भाईचारा और एकता की सुंदर छवि प्रस्तुत कर रही हो। यह मटकी फोड़ने की प्रतियोगिता सिर्फ खेल नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बीच एकजुट होकर सफलता पाने का प्रतीक भी है।

दही हांडी (जीवन की सीख और भक्ति का उत्सव)
दही हांडी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की गहरी जीवन शिक्षाओं का उत्सव है। यह पर्व हमें प्रेम, साहस और अटूट विश्वास की ताकत सिखाता है। बचपन में कृष्ण की मटकी फोड़ने की शरारतें सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण सबक हैं। यह बताता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, एकजुट होकर प्रेम और सहयोग से हर बाधा को पार किया जा सकता है।
मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने वाली टोली इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जहां सभी एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं और मिलकर सफलता हासिल करते हैं। दही हांडी हमें आध्यात्मिक रूप से भी जोड़ती है और कृष्ण भक्ति की शक्ति को महसूस कराती है। यह त्योहार प्रेम, एकता और विश्वास की नई ऊर्जा से भक्तों के दिलों को भर देता है।
लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।

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