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Chaitra Purnima 2024: इस शुभ मुहूर्त पर करें चैत्र पूर्णिमा का स्नान, नहीं आएगी किसी कार्य में बाधा

चैत्र पूर्णिमा (Chaitra Purnima 2024) का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस बार यह 23 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस शुभ दिन पर साधक भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इसे चैती पूनम के रूप में भी जाना जाता है जब यह समय इतना करीब है तो आइए इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं जो यहां दी गई हैं -

By Vaishnavi Dwivedi Edited By: Vaishnavi Dwivedi Published: Mon, 22 Apr 2024 11:31 AM (IST)Updated: Mon, 22 Apr 2024 11:31 AM (IST)
Chaitra Purnima 2024: चैत्र पूर्णिमा 2024 स्नान का शुभ मुहूर्त

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Purnima 2024: साल के सबसे शुभ समय में से एक पूर्णिमा तिथि होती है। 23 अप्रैल, 2024 को यह पूरे देश में बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाई जाती है। चैत्र पूर्णिमा गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्र के बाद आती है। हिंदू इस दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इसे चैती पूनम के रूप में भी जाना जाता है, जब यह समय इतना करीब है, तो आइए इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं -

चैत्र पूर्णिमा 2024 स्नान का शुभ मुहूर्त

चैत्र पूर्णिमा पर अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना बेहद शुभ होता है। इसके साथ ही स्नान-दान के लिए मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 52 मिनट से प्रातः 6 बजकर 5 मिनट तक है। वहीं, चंद्रमा पूजन का शाम 6 बजकर 52 मिनट है। यहां दिए गए समय के अनुसार आप अपनी पूजा विधियों को कर सकते हैं।

पूर्णिमा व्रत के लाभ

पूर्णिमा का व्रत करने से शरीर और मन पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। पूर्णिमा के इस पवित्र व्रत के जरिए साधक सहनशक्ति शक्ति बढ़ती है। इसके जरिए मन और शरीर को आराम करने का अवसर मिलता है। इसके अलावा इस व्रत के प्रभाव से घर में समृद्धि और खुशी आती है।

यही कारण है कि लोग पुराने समय से इस व्रत का पालन कर रहे हैं। हालांकि जो लोग व्रत रख रहे हैं वे कोशिश करें कि मसालेदार चीजें न खाएं और ज्यादा से ज्यादा पूजा-पाठ पर जोर दें।

गंगा स्नान करते समय इस मंत्र का करें जाप

  • ''गंगा गंगेति यो ब्रूयात, योजनाम् शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्यो, विष्णुलोके स: गच्छति॥''

भगवान विष्णु ध्यान मंत्र

  • ''यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात्। विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे।।''

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डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।


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