लंबी उम्र का वरदान है भाई दूज पर बहन के घर भोजन करना! पढ़ें अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति का रहस्य
भाई दूज पर बहन के घर भोजन करने की परंपरा का विशेष महत्व है, जो भाई-बहन के प्रेम और अटूट ...और पढ़ें

भाई दूज पर बहन के घर भोजन करने से मिलता है लंबी उम्र का वरदान (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
भाई दूज पर बहन के घर भोजन का महत्व।
अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति का वरदान।
यमराज और यमुना की पौराणिक कथा से जुड़ा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाई दूज का पर्व भाई और बहन के प्रेम, स्नेह और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। यह हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। वहीं इस दिन के लिए एक परंपरा यह भी है कि इस दिन भाई को अपनी बहन के घर भोजन जरूर करना चाहिए।
इस साल भाई दूज 11 नवंबर को मनाया जाएगा। आइए आपको बताते हैं इस दिन भाइयों का बहन के घर में भोजन करना जरूरी क्यों होता है और इससे किस तरह से भाई को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
भाई दूज पर बहन के घर भोजन करने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज के दिन भाई को अपनी बहन के घर जाकर भोजन जरूर करना चाहिए। इस दिन बहन के घर भोजन करना केवल एक पारिवारिक परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और अपनापन बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि भाई दूज पर बहन अपने भाई का आदर-सत्कार करती है और उन्हें अपने हाथों से भोजन कराती है। इसके बदले भाई अपनी बहन को सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा देता है।
ऐसा करने से दोनों के बीच स्नेह और विश्वास का रिश्ता मजबूत होता है। यही नहीं इस दिन बहनें भाइयों को माथे पर टीका लगाती हैं, जो उनकी दीर्घायु की कामना से जुड़ा होता है और यदि भाई अपनी बहन के घर भोजन करता है तो उसके लिए अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है।
यमराज और यमुना से जुड़ी है यह परंपरा
भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यदेव की संतान यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना अपने भाई यमराज से हमेशा अपने घर आने और भोजन करने का आग्रह करती थीं। ऐसा कहा जाता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया, माथे पर तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन कराया।
बहन के इस प्रेम और सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। उस समय यमुना ने एक यह वरदान मांगा कि जो भाई यम द्वितीया के दिन अपनी बहन के घर भोजन करे उसके जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाए। यमराज ने अपनी बहन यमुना की यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।
उसी समय से मान्यता है कि जो भाई भाई दूज के दिन अपनी बहन के घर भोजन ग्रहण करेगा उसके जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर होगा।
इन्हीं कारणों से भाई दूज पर बहन के घर भोजन करने की परंपरा को विशेष महत्व बताया जाता है और इस परंपरा से भाई और बहन के बीच प्रेम भी बढ़ता है।
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