Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    Sakat Chauth 2026: संतान सुख के लिए सकट चौथ पर करें इस मंगलकारी स्तोत्र का पाठ, कर्ज की समस्या से भी मिलेगी मुक्ति

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 10:00 PM (IST)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 6 जनवरी को लंबोदर संकष्टी चतुर्थी (सकट चौथ) मनाई जाएगी। यह पर्व देवी सकट और भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन सकट मा ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    Sakat Chauth 2026: संतान सुख के लिए करें ये उपाय

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 06 जनवरी को लंबोदर संकष्टी चतुर्थी है। यह पर्व हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इसे सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। सकट चौथ व्रत देवी मां सकट को समर्पित होता है।

    ganesh ji

    इस दिन देवी मां सकट की पूजा करने से संतान सुख का वरदान मिलता है। इसके साथ ही संतान दीर्घायु होता है। वहीं, भगवान गणेश की कृपा से सुख, सौभाग्य और आय में वृद्धि होती है और सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

    अगर आप भी संतान सुख का वरदान पाना चाहते हैं, तो माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन स्नान-ध्यान के बाद भक्ति भाव से सकट माता और भगवान गणेश की पूजा करें। वहीं, पूजा के समय भगवान गणेश को मोदक और दूर्वा अर्पित करें। साथ ही संतान प्राप्ति के लिए संतान गणेश स्तोत्र का पाठ करें।

    संतान प्राप्ति गणेश स्तोत्र

    ॐ नमोस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धि प्रदाय च |

    सर्वप्रदाय देवाय पुत्रवृद्धिप्रदाय च | |

    गुरुदराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यसिताय च |

    गोप्याय गोपितशेषभुवनाय चिदात्मने ||

    विश्वमूलाय भव्याय विश्वसृष्टिकराय ते |

    नमो नमस्ते सत्याय सत्यपूर्णाय शुण्डिने ||

    एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः |

    प्रपन्नजनपालय प्रणतार्ति विनाशिने ||

    शरणं भव देवेश सन्ततिं सुद्रढां कुरु |

    भविष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गणनायक ||

    ते सर्वे तव पूजार्थे निरताः स्युर्वरो मतः |

    पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकं ||

    ॥ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् ॥

    ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।

    षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥

    महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।

    एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥

    एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।

    महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥

    शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।

    सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥

    रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।

    रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥

    कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।

    कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥

    पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।

    पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥

    सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।

    सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥

    एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।

    षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥

    सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥

    संकटनाशन गणेश स्तोत्र

    प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम ।

    भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥

    प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम ।

    तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम॥

    लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।

    सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥

    नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम ।

    एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥

    द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर:।

    न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥

    विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।

    पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥

    जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।

    संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय:॥

    अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत ।

    तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:॥

    ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र

    ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम् ।

    ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम् ॥

    सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजित: फल-सिद्धए ।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥

    त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चित:।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥

    हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चित:।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥

    महिषस्य वधे देव्या गण-नाथ: प्रपुजित:।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥

    तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजित: ।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे॥

    भास्करेण गणेशो हि पूजितश्छवि-सिद्धए ।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥

    शशिना कान्ति-वृद्धयर्थं पूजितो गण-नायक:।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥

    पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजित:।

    सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥

    इदं त्वृण-हर-स्तोत्रं तीव्र-दारिद्र्य-नाशनं,

    एक-वारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं सामहित:।

    दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेर-समतां व्रजेत्॥

    यह भी पढ़ें- Sakat Chauth 2026: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय न करें ये गलतियां, जानें विधि और चंद्र दर्शन का समय

    यह भी पढ़ें- Sakat Chauth 2026: सकट चौथ व्रत में करें गणेश चालीसा का पाठ, मिलेगा सुख-सौभाग्य का वरदान

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।