Sakat Chauth 2026: गणपति बाप्पा के ये मंत्र दिलाएंगे कर्ज से मुक्ति और करियर में तरक्की, घर में होगी खुशियों की बरसात
सकट चौथ, जिसे लंबोदर संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती ...और पढ़ें

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ का धार्मिक महत्व
HighLights
माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी सकट माता को समर्पित है।
सकट माता की पूजा करने से संतान सुख का वरदान मिलता है।
इस दिन भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 06 जनवरी को सकट चौथ है। इसे लंबोदर संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। यह पर्व हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है।

वहीं, संतान सुख की कामना करने वाले साधक माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट माता के निमित्त व्रत रखते हैं। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से सुख, सौभाग्य और वंश में वृद्धि होती है।
अगर आप भी आर्थिक विषमता से निजात पाना चाहते हैं, तो सकट चौथ के दिन पूजा के समय इन शक्तिशाली मंत्रों का जप करें। इन मंत्रों के जप से हर मनोकामना पूरी होती है।
गणेश मंत्र
1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
2. ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
3. ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
4. ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
5. ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
6. ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।
7. “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं चिरचिर गणपतिवर वर देयं मम वाँछितार्थ कुरु कुरु स्वाहा ।”
8. गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् ॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित् ।
9. ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
10. ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
श्रीगणेशमन्त्रस्तोत्रम्
शृणु पुत्र महाभाग योगशान्तिप्रदायकम् ।
येन त्वं सर्वयोगज्ञो ब्रह्मभूतो भविष्यसि ॥
चित्तं पञ्चविधं प्रोक्तं क्षिप्तं मूढं महामते ।
विक्षिप्तं च तथैकाग्रं निरोधं भूमिसज्ञकम् ॥
तत्र प्रकाशकर्ताऽसौ चिन्तामणिहृदि स्थितः ।
साक्षाद्योगेश योगेज्ञैर्लभ्यते भूमिनाशनात् ॥
चित्तरूपा स्वयंबुद्धिश्चित्तभ्रान्तिकरी मता ।
सिद्धिर्माया गणेशस्य मायाखेलक उच्यते ॥
अतो गणेशमन्त्रेण गणेशं भज पुत्रक ।
तेन त्वं ब्रह्मभूतस्तं शन्तियोगमवापस्यसि ॥
इत्युक्त्वा गणराजस्य ददौ मन्त्रं तथारुणिः ।
एकाक्षरं स्वपुत्राय ध्यनादिभ्यः सुसंयुतम् ॥
तेन तं साधयति स्म गणेशं सर्वसिद्धिदम् ।
क्रमेण शान्तिमापन्नो योगिवन्द्योऽभवत्ततः ॥
यह भी पढ़ें- Sakat Chauth 2026: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय न करें ये गलतियां, जानें विधि और चंद्र दर्शन का समय
यह भी पढ़ें- Sakat Chauth 2026: सकट चौथ व्रत में करें गणेश चालीसा का पाठ, मिलेगा सुख-सौभाग्य का वरदान
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
