Radha Ashtami पर जरूर करें इस स्तोत्र का पाठ, किशोरी जी की कृपा से सभी कष्ट होंगे दूर
हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (Radha Ashtami 2025) पर राधा अष्टमी मनाई जाती है। इस बार यह व्रत 31 अगस्त को किया जा रहा है। इस खास मौके पर हम आपको एक ऐसे स्तोत्र के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी रचना स्वयं भगवान शिव द्वारा की गई है। उन्होंने यह स्तोत्र देवी पार्वती को सुनाया था।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। राधा अष्टमी के दिन व्रत करना विशेष फलदायी माना गया है। इस खास मौके पर आप श्री राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। इस स्तोत्र में राधा रानी के शृंगार और रूप के साथ-साथ उनकी करूणा का भी वर्णन किया गया है। ऐसे में यदि आप श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो इससे राधना रानी के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की कृपा भी आपको प्राप्त हो सकती है।
श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र (Shri Radha Kripa Kataksh Stotra)
राधा साध्यम साधनं यस्य राधा, मंत्रो राधा मन्त्र दात्री च राधा,
सर्वं राधा जीवनम् यस्य राधा, राधा राधा वाचिकिम तस्य शेषम।
मुनीन्दवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी, प्रसन्नवक्त्रपंकजे निकंजभूविलासिनी,
व्रजेन्दभानुनन्दिनी व्रजेन्द सूनुसंगते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम् (1)
अशोकवृक्ष वल्लरी वितानमण्डपस्थिते, प्रवालज्वालपल्लव प्रभारूणाङि्घ् कोमले,
वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्। (2)
अनंगरंगमंगल प्रसंगभंगुरभ्रुवां, सुविभ्रम ससम्भ्रम दृगन्तबाणपातनैः,
निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (3)
तड़ित्सुवणचम्पक प्रदीप्तगौरविगहे, मुखप्रभापरास्त-कोटिशारदेन्दुमण्ङले,
विचित्रचित्र-संचरच्चकोरशावलोचने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (4)
मदोन्मदातियौवने प्रमोद मानमणि्ते, प्रियानुरागरंजिते कलाविलासपणि्डते,
अनन्यधन्यकुंजराज कामकेलिकोविदे, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्। (5)
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राधा रानी के नाम लिए बिना भगवान श्रीकृष्ण की आराधना अधूरी मानी जाती है। ऐसे में यदि आप राधा अष्टमी का व्रत करते हैं, तो इससे राधा रानी के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की कृपा के पात्र भी बन सकते हैं।
अशेषहावभाव धीरहीर हार भूषिते, प्रभूतशातकुम्भकुम्भ कुमि्भकुम्भसुस्तनी,
प्रशस्तमंदहास्यचूणपूणसौख्यसागरे, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (6)
मृणालबालवल्लरी तरंगरंगदोलते, लतागलास्यलोलनील लोचनावलोकने,
ललल्लुलमि्लन्मनोज्ञ मुग्ध मोहनाश्रये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (7)
सुवर्ण्मालिकांचिते त्रिरेखकम्बुकण्ठगे, त्रिसुत्रमंगलीगुण त्रिरत्नदीप्तिदीधिअति,
सलोलनीलकुन्तले प्रसूनगुच्छगुम्फिते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (8)
नितम्बबिम्बलम्बमान पुष्पमेखलागुण, प्रशस्तरत्नकिंकणी कलापमध्यमंजुले,
करीन्द्रशुण्डदण्डिका वरोहसोभगोरुके, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (9)
भगवान शिव ने यह स्तोत्र माता पार्वती को सुनाया था। यह राधा रानी की एक प्रभावशाली प्रार्थना मानी गई है। मान्यता है कि इस स्तोत्र के पाठ से साधक के सभी दुख-दर्द दूर हो सकते हैं।
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अनेकमन्त्रनादमंजु नूपुरारवस्खलत्, समाजराजहंसवंश निक्वणातिग,
विलोलहेमवल्लरी विडमि्बचारूचं कमे, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्। (10)
अनन्तकोटिविष्णुलोक नमपदमजाचिते, हिमादिजा पुलोमजा-विरंचिजावरप्रदे,
अपारसिदिवृदिदिग्ध -सत्पदांगुलीनखे, कदा करिष्यसीह मां कृपा -कटाक्ष भाजनम्। (11)
मखेश्वरी क्रियेश्वरी स्वधेश्वरी सुरेश्वरी, त्रिवेदभारतीयश्वरी प्रमाणशासनेश्वरी,
रमेश्वरी क्षमेश्वरी प्रमोदकाननेश्वरी, ब्रजेश्वरी ब्रजाधिपे श्रीराधिके नमोस्तुते। (12)
इतीदमतभुतस्तवं निशम्य भानुननि्दनी, करोतु संततं जनं कृपाकटाक्ष भाजनम्,
भवेत्तादैव संचित-त्रिरूपकमनाशनं, लभेत्तादब्रजेन्द्रसूनु मण्डलप्रवेशनम्। (13)
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