Panch Dev Puja: पंच देवताओं के पूजन में करें इन मंत्रों का जप, सदा बनी रहेगी सुख-समृद्धि
हिंदू धर्म में पंच देवताओं का पूजन करना काफी शुभ फलदायी माना जाता है जिसमें गणेश जी भगवान शिव मां दुर्गा भगवान विष्णु और सूर्यदेव शामिल हैं। पंच देव की पूजा से साधक की सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। ऐसे में यदि आप रोजाना पांच देवताओं के मंत्रों का जप करते हैं तो आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सकता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर व्यक्ति अपनी श्रद्धानुसार ईश्वर की आराधना करता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पूजा-अर्चना को ईश्वर तक अपनी प्रार्थना पहुंचाने का एक माध्यम माना गया है। साथ ही यह भी माना जाता है कि रोजाना पूजा पाठ से घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। पंचदेव की पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है, क्योंकि गणपति जी को प्रथम पूज्य देव माना गया है।
गणेश जी का मंत्र
पूजा के दौरान सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें और इस मंत्र का जप करें -
खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं
प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम् ।
दन्ताघातविदारितारिरुधिरैः सिन्दूरशोभाकरं
वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् ॥
ॐ श्री गणेशाय नमः,ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समर्पयामि ।
ॐ श्री गणेशाय नमः, पाद्यं, अर्घ्यं, आचमन्यं, स्नानं समर्पयामि।
सूर्य देव का मंत्र
(Picture Credit: Freepik)
आप इस मंत्र का जप सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करते समय भी कर सकते हैं। इसके लिए एक तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल रंग फूल मिलाएं और भगवान सूर्य को जल अर्पित करें।
रक्ताम्बुजासनमशेषगुणैकसिन्धुं
भानुं समस्तजगतामधिपं भजामि।
पद्मद्वयाभयवरान् दधतं कराब्जै-
र्माणिक्यमौलिमरुणांगरुचिं त्रिनेत्रम्॥
ॐ श्री सूर्याय नमः, ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समपर्यामि ।
ॐ श्री सूर्याय नमः, पाद्यं, अर्घ्यं, आचमन्यं, स्नानं समर्पयामि।
मां दुर्गा का मंत्र
सिंहस्था शशिशेखरा मरकतप्रख्यैश्चतुर्भिर्भुजैः
शंख चक्रधनुः शरांश्च दधती नेत्रैस्त्रिभिः शोभिता।
आमुक्तांगदहारकंकणरणत्काञ्चीरणन्नूपुरा
दुर्गा दुर्गतिहारिणी भवतु नो रत्नोल्लसत्कुण्डला॥
ॐ श्री दुर्गायै नमः, ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समपर्यामि ।
ॐ श्री दुर्गायै नमः, पाद्यं, अर्घ्यं, आचमन्यं, स्नानं समर्पयामि।
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शिव जी का मंत्र
प्रतिदिन, खासकर सोमवार के दिन शिव जी का जलाभिषेक करें। इसी के साथ बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करें। साथ ही शिव जी के इन मंत्रों का जप भी करते रहें -
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचंद्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम् ।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानंविश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभय हरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम् ।
ॐ नमः शिवाय,ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समर्पयामि ।
ॐ नमः शिवाय, पाद्यं, अर्घ्यं, आचमन्यं स्नानं समर्पयामि।
विष्णु जी के मंत्र
उद्यत्कोटिदिवाकराभमनिशं शंख गदां पंकजं
चक्रं बिभ्रतमिन्दिरावसुमतीसंशोभिपार्श्वद्वयम्।
कोटीरांगदहारकुण्डलधरं पीताम्बरं कौस्तुभै-
र्दीप्तं श्विधरं स्ववक्षसि लसच्छीवत्सचिह्रं भजे॥
ॐ श्री विष्णवे नमः,ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समर्पयामि ।ॐ विष्णवे नमः, पाद्यं, अर्घ्यं, आचमन्यं, स्नानं समर्पयामि।
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