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Karwa Chauth Vrat Katha 2022: करवा चौथ पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये कथा, वैवाहिक जीवन रहेगा सुखी

2022 Karwa Chauth Aarti 13 अक्टूबर को करवा चौथ का सुहागिन महिलाएं विधि विधान से रख रही हैं। अगर आप भी करवा चौथ का व्रत रखती हैंतो विधिवत पूजा करने के साथ-साथ इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।

By Shivani SinghEdited By: Published: Wed, 12 Oct 2022 10:00 AM (IST)Updated: Thu, 13 Oct 2022 08:13 PM (IST)
Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ व्रत करते समय जरूर पढ़ें ये कथा, वैवाहिक जीवन रहेगा सुखी

नई दिल्ली, Karwa Chauth Aarti 2022 : हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस पावन पर्व में सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके शिव जी और माता पार्वती की पूजा करती हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन पूजा करने के साथ इन कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। कभी व्रत पूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं करवा चौथ व्रत कथा के बारे में।

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करवा चौथ व्रत की कथा

करवा चौथ की पौराणिक कथा के अनुसार, तुंगभद्रा नदी के पास देवी करवा अपने पति के साथ रहती थीं। एक दिन उनके पति नदी में स्नान करने गए थे, तो वहां उन्हें एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और नदी में खींचने लगा। करवा के पति उन्हें पुकारने लगे। आवाज सुनकर जैसे ही करवा दौड़कर नदी के पास पहुंचीं तो उन्हें देखा कि मगरमच्छ उनके पति को मुंह में पकड़कर नदी में ले जा रहा था। यह देखकर तुरंत ही करवा ने एक कच्चा धागा लिया और मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया। करवा का सतीत्व इतना मजबूत था कि वो कच्चा धागा टस से मस नहीं हुआ।

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अब स्थिति ऐसी थी मगरमच्छ और करवा के पति दोनों के ही प्राण संकट में थे। फिर करवा ने यमराज को पुकारा। करवा ने यमराज से प्रार्थना की कि वो उनके पति को जीवनदान और मगरमच्छ को मृत्युदंड दें। लेकिन यमराज ने उन्हें मना कर दिया। उन्होंने कहा कि मगरमच्छ की आयु अभी बाकी है तो वो उन्हें मृत्युदंड नहीं दे सकता है। लेकिन उनके पति की आयु शेष नहीं है। यह सुनकर करवा बेहद क्रोधित हो गईं। उन्होंने यमराज को शाप देने को कहा। उनके शाप से डरकर यमराज ने तुरंत ही मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया, साथ ही करवा के पति को जीवनदान दे दिया।

यही कारण है कि करवा चौथ का व्रत किया जाता है और प्रार्थना की जाती है कि हे करवा माता जैसे आपने अपने पति को मृत्यु के मुंह से वापस निकाल लिया था वैसे ही मेरे सुहाग की भी रक्षा करना। करवा माता के द्वारा बांधा गया वो कच्चा धागा प्रेम और विश्वास का था। इसके चलते ही यमराज सावित्री के पति के प्राण अपने साथ नहीं ले जा पाए।

Pic Credit- Freepik

डिसक्लेमर

इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।


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