नई दिल्ली, Guru Purnima 2022: पंचांग के अनुसार,आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व होता है। आज के दिन अपने गुरुओं की उपासना करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में भी गुरुओं को देवी-देवता से उच्च बताया गया है। आज के दिन गुरुओं के साथ-साथ वेद व्यास जी की भी पूजा करने का विधान है। क्योंकि हिंदू धर्म में गुरु का स्थान देवताओं से ऊंचा रखा गया है इसलिए इनकी भी पूजा देवताओं की तरह की ही की जाती है। इस साल गुरु पूर्णिमा में एक नहीं बल्कि कई शुभ योग बन रहे हैं। इन योगों में गुरु की पूजा करने का विशेष फल मिलेगा। जानिए गुरु पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त, महासंयोग और गुरु की उपासना करने का तरीका

Guru Purnima 2022: गुरु पूर्णिमा पर बन रहा अद्भुत राज योग, भाग्य चमकाने के लिए जरूर करें ये खास उपाय।

गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 13 जुलाई को सुबह 4 बजकर 1 मिनट से शुरू

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त- 14 जुलाई रात 12 बजकर 6 मिनट तक

इंद्र योग- 12 जुलाई शाम 4 बजकर 59 मिनट से 13 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 7 मिनट तक

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र - 13 जुलाई सुबह 2 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 18 मिनट तक

गुरु पूर्णिमा पर बन रहा राजयोग

गुरु पूर्णिमा का स्नान-दान का समय: 13 जुलाई को सुबह करीब 4 बजे से शुरू

गुरु पूर्णिमा पर बन रहा पंचमहापुरुष योग

गुरु पूर्णिमा के दिन रूचक, भद्र, हंस, शश और मालव्य योग नाम के पांच विशेष योग बन रहे हैं। इन पांचों शुभ योगों के मिलने से पंचमहापुरुष योग बन रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल गुरु पूर्णिमा के दिन ग्रह-नक्षत्रों का खास संयोग बन रहा है। इस दिन मिथुन राशि में गुरु, मंगल, बुध और शनि की युति होने वाली है। जहां सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग, मंगल के मेष राशि में होने से रुचक योग, गुरु के मीन राशि में होने से केंद्र में हंस योग, बुध के मिथुन में गोचर करने के कारण भद्र योग, शुक्र अपनी राशि में होते हैं ,तो मालव्य .योग, और शनिदेव के मकर राशि में होने के कारण शश योग जैसे शुभ योग बन रहे हैं।

गुरु और चंद्रमा की युति के कारण गुरु पूर्णिमा पर गजकेसरी योग बन रहा है। इस योग में पूजा पाठ करने से सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ ही गुरु पूर्णिमा के दिन रवि योग भी लग रहा है।

गुरु पूर्णिमा को कैसे करें गुरु की उपासना

गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की उपासना करना शुभ माना जाता है। इस दिन गुरु को उच्च स्थान में बैठा के जल से चरणों को धुला जाता है। इसके बाद साफ कपड़े से पैरों को पोंछ दें। इसके बाद पीले या फिर सफेद फूल अर्पित करें। इसके बाद पीले या फिर श्वेत वस्त्र दें। फिर अपनी योग्यता अनुसार भोग लगा दें। इसके बाद गुरु से अपने दायित्व को स्वीकार करने की प्रार्थना करें।

Pic Credit- INSTAGRAM/ dhruv_graphics_2021

डिसक्लेमर

'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'

Edited By: Shivani Singh

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट