Chhath Puja Song 2020: छठ पूजा आज यानी 18 नवंबर से शुरू होकर 21 नवंबर तक चलेगी। छठी मईया को अर्घ्य देने के लिए 20 नवंबर को शाम के समय भक्त पानी में उतरेंगे। फिर उगते हुए सूरज को 21 नवंबर की सुबह अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन किया जाएगा। आज नहाय-खाय किया जाएगा। फिर 19 नवंबर को खरना या लोहंडा मनाया जाएगा। इस व्रत का महत्व बहुत अधिक होता है। इस त्यौहार को खासतौर पर बिहार में मनाया जाता है। इस व्रत को करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त होता है। कहा जाता है कि यह व्रत संतान की रक्षा और उनके जीवन की खुशहाली के लिए किया जाता है।

दिवाली के बाद की जानी वाली छठ पूजा का लोक महत्व बहुत ज्यादा है। छठ पूजा को डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा और सूर्य षष्ठी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भक्तों की भक्ती से प्रसन्न होकर छठी मैया विवाहित जोड़ों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं। साथ ही नि:संतान दंपत्तियों की मनोकामना को पूरा भी करती हैं। सूर्य देव व्रती के निरोगी तथा सुखी जीवन का आशीष प्रदान करते हैं। इस दौरान छठी मईया की आरती तो करनी ही चाहिए साथ ही छठी मईया का गीत भी गाना चाहिए। जागरण आध्यात्म के इस लेख में हम आपको पहिले पहिल, छठी मईया व्रत तोहार गीत बता रहे हैं जो छठ पूजा के दौरान गाया जाता है। आइए पढ़ते हैं छठी मईया का गीत।

छठी मईया का गीत:

पहिले पहिल हम कईनी,

छठी मईया व्रत तोहार ।

करिहा क्षमा छठी मईया,

भूल-चूक गलती हमार ।

सब के बलकवा के दिहा,

छठी मईया ममता-दुलार ।

पिया के सनईहा बनईहा,

मईया दिहा सुख-सार ।

नारियल-केरवा घोउदवा,

साजल नदिया किनार ।

सुनिहा अरज छठी मईया,

बढ़े कुल-परिवार ।

घाट सजेवली मनोहर,

मईया तोरा भगती अपार ।

लिहिएं अरग हे मईया,

दिहीं आशीष हजार ।

पहिले पहिल हम कईनी,

छठी मईया व्रत तोहर ।

करिहा क्षमा छठी मईया,

भूल-चूक गलती हमार । 

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