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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bada Mangal 2025: बड़े मंगल के दिन किया गया ये पाठ, वैवाहिक जीवन की समस्याओं की करेगा काट

Published: Fri, 23 May 2025 06:29 PM (IST)

ज्येष्ठ माह माह का तीसरा बड़ा मंगल 27 मई को पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी ...और पढ़ें

बड़े मंगल पर जरूर करें ये पाठ (Picture Credit: Freepik)
बड़े मंगल पर जरूर करें ये पाठ (Picture Credit: Freepik)

HighLights

  1. हनुमान जी के लिए समर्पित है बड़े मंगल का दिन।
  2. भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं बजरंगबली जी।
  3. बड़े मंगल का व्रत करने से मिलती है सुख-समृद्धि।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्येष्ठ माह की शुरुआत 13 मई से बड़े मंगल के साथ हो चुकी है। इस बार ज्येष्ठ माह में 5 बड़े मंगल पड़ने वाले हैं, जिसपर भक्त हनुमान जी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार पर ही भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी की भेंट हुई ती। ऐसे में आप बड़े मंगल की पूजा में संकटमोचन हनुमाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak) का पाठ करके बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 

॥ हनुमानाष्टक ॥

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,

तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।

ताहि सों त्रास भयो जग को,

यह संकट काहु सों जात न टारो ।

देवन आनि करी बिनती तब,

छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि,

संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,

जात महाप्रभु पंथ निहारो ।

चौंकि महामुनि साप दियो तब,

चाहिए कौन बिचार बिचारो ।

कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,

सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥

अंगद के संग लेन गए सिय,

खोज कपीस यह बैन उचारो ।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु,

बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।

हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,

लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥

रावण त्रास दई सिय को सब,

राक्षसी सों कही सोक निवारो ।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु,

जाए महा रजनीचर मारो ।

चाहत सीय असोक सों आगि सु,

दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥

(Picture Credit: Freepik)

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बान लग्यो उर लछिमन के तब,

प्राण तजे सुत रावन मारो ।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत,

तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।

आनि सजीवन हाथ दई तब,

लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥

बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा के बाद संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ करने से आपको वैवाहिक जीवन में आ रही सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और दुर्भाग्य दूर होता है।

रावन युद्ध अजान कियो तब,

नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,

मोह भयो यह संकट भारो I

आनि खगेस तबै हनुमान जु,

बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,

लै रघुनाथ पताल सिधारो ।

देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,

देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।

जाय सहाय भयो तब ही,

अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥

काज किये बड़ देवन के तुम,

बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।

कौन सो संकट मोर गरीब को,

जो तुमसे नहिं जात है टारो ।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,

जो कछु संकट होय हमारो ॥ ८ ॥

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,

अरु धरि लाल लंगूर ।

वज्र देह दानव दलन,

जय जय जय कपि सूर ॥

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।