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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Highest Krishna Temple: यहां स्थित है दुनिया का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर, पांडवों से जुड़ा है इतिहास

Published: Tue, 17 Sep 2024 03:19 PM (IST)

भारत में कई चमत्कारी और अद्भुत मंदिर स्थित हैं जिसके दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से पहुंचते हैं। इसी ...और पढ़ें

Highest Krishna Temple: हिमाचल में स्थित है दुनिया का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर
Highest Krishna Temple: हिमाचल में स्थित है दुनिया का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर

HighLights

  1. हिमाचल में स्थित है भगवान श्रीकृष्ण का सबसे ऊंचा मंदिर।
  2. पर्यटन के लिहाज से भी अद्भुत है यह स्थान।
  3. जन्माष्टमी और होल पर उमड़ती है भक्तों की भीड़।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों का जिक्र करते हैं, तो सबसे पहले हमारे मन में मथुरा, वृंदावन का ही ख्याल आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे ऊंचा कृष्ण मंदिर मथुरा या वृंदावन में नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश में स्थित है। तो चलिए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें।

ये है खासियत

हिमाचल प्रदेश किन्नौर के निचार में युल्ला कांडा में भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर स्थापित है। यह दुनिया के सबसे ऊंचे कृष्ण मंदिर के रूप में जाना जाता है, जो लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर तो सुंदर है ही, साथ ही यहां से दिखने वाले नजारे भी बहुत लुभावने हैं। मंदिर में जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है और जन्माष्टमी मेले का भी आयोजन किया जाता है। इस दौरान दर्शन के लिए कई भक्त यहां पहुचते हैं। इसी के साथ होली के खास मौके पर भी यहां भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है।

झील से जुड़ी मान्यता

युल्ला कांडा कृष्ण मंदिर एक झील के बीचो-बीच में स्थित है। इस झील से यह मान्यता जुड़ी है कि स्थानीय लोगों का मानना है कि पांचों पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस झील का निर्माण किया था, जहां आज कृष्ण मंदिर स्थापित है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों की इस मंदिर से इतनी आस्था जुड़ी हुई है।

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मनोकामना होती है पूरी

असल में युला कांडा ट्रैकिंग के लिए बनाया गया एक ट्रैक है, जिसकी सहायता से आप पैदल भी भगवान कृष्ण के इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं। आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थान काफी मायने रखता है। जन्माष्टमी के दिन यहां श्रद्धालु किन्नौरी टोपी को उल्टा करके झील में डालते हैं। यदि किसी की टोपी बिना डूबे एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच जाती है, तो यह माना जाता है कि उस व्यक्ति की मनोकामना जरूर पूरी होगी।

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