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गया का विष्णुपद मंदिर: पितरों को मोक्ष दिलाने वाले इस पावन धाम की क्या है खासियत और मान्यता

Published: Mon, 28 Sep 2026 07:00 AM (IST)

पितृ पक्ष में गया के विष्णुपद मंदिर का विशेष महत्व है, जहां पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के ...और पढ़ें

बेहद खास है विष्णु पद मंदिर

बेहद खास है विष्णु पद मंदिर

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

देश में बिहार के गया जी में पिंडदान करना अधिक पुण्यकारी माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों का तर्पण करने आते हैं। गया में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु श्राद्ध कर्म के लिए पहुंचते हैं। हम बात कर रहे हैं बिहार के गया स्थित विष्णुपद मंदिर की। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर आप भी इस बार पितृ पक्ष में विष्णुपद मंदिर जाने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो जाने से पहले इस आर्टिकल में मंदिर से जुड़ी खास बातें जरूर जान लें।

विष्णुपद मंदिर में होता है पिंडदान

बिहार के गया जिले में पवित्र फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर स्थित है। यह मंदिर जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने गयासुर नामक असुर के मस्तक पर अपना पैर रखा था, इसी वजह से इस मंदिर को विष्णुपद के नाम से जाना जाता है।

वर्तमान में यह मंदिर पिंडदान के लिए अधिक प्रसिद्ध है। पितृ पक्ष की अवधि के दौरान भारी संख्या में लोग अपने पितरों की शांति के लिए गया आते हैं और विष्णुपद मंदिर में पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में विधिपूर्वक पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

विष्णुपद मंदिर में मौजूद हैं भगवान विष्णु के चरण चिह्न

धार्मिक दृष्टि से बिहार के गया जिले को अधिक पवित्र माना जाता है। इस जिले का नाम गयासुर नामक असुर के नाम पर पड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार, गयासुर को एक खास वरदान प्राप्त था कि उसके दर्शन मात्र से किसी को भी मोक्ष मिल जाएगा। इस वरदान के कारण पापी मनुष्यों को भी मोक्ष मिलने लगा, जिससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा।

ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु ने धर्म और मानवता की रक्षा करने के लिए गयासुर की छाती पर अपना दाहिना पैर रखा और उसे पाताल लोक भेज दिया। बताया जाता है कि आज भी गया के विष्णुपद मंदिर में चट्टान पर भगवान विष्णु के वे पवित्र चरण चिह्न मौजूद हैं, जिनकी पूजा की जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।