23 सितंबर से अस्त होंगे शुक्र देव, शुभ काम से लेकर नए व्यापार तक... इन कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र ग्रह 23 सितंबर को अस्त हो रहे हैं, जिससे शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक ...और पढ़ें

शुक्र अस्त में क्या न करें (Picture Credits- AI Images)
HighLights
शुक्र ग्रह 23 सितंबर को अस्त होने जा रहे हैं।
विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
नया व्यापार और बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब कोई ग्रह राशि परिवर्तन करता है, तो उसका प्रभाव राशियों पर पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक जीवन, कला, प्रेम और धन-ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब शुक्र ग्रह सूर्य के पास आ जाता है, तो शुक्र का प्रभाव कम हो जाता है, जिसे शुक्र अस्त कहा जाता है।
शुक्र अस्त की अवधि के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को नहीं करना चाहिए। वर्जित कामों को करने से अशुभ फल की प्राप्ति होती है। इसलिए ज्योतिष शास्त्र में बताए गए नियमों के बारे में जरूर जान लें। 23 सितंबर को शुक्र ग्रह अस्त होने जा रहे हैं। शुक्र अस्त होने से राशियों के जीवन में कई बड़े बदलाव आएंगे। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि शुक्र अस्त के दौरान कौन-से काम नहीं करने चाहिए।
शुक्र अस्त में न करें ये काम
विवाह और सगाई- जब शुक्र अस्त होते हैं, तो इस अवधि के दौरान विवाह और सगाई जैसे मांगलिक काम नहीं करने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शुक्र अस्त के दौरान इन वर्जित कामों को करने से शादी में अड़चनें आती हैं और वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन नहीं होता है।
गृह प्रवेश और निर्माण कार्य- इसके अलावा शुक्र अस्त के दौरान गृह प्रवेश और निर्माण कार्य भी नहीं करने चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र अस्त के दौरान ऐसा करना अशुभ माना जाता है। अगर आप घर में सुख-शांति चाहते हैं, तो शुक्र अस्त की अवधि के दौरान गृह प्रवेश और निर्माण कार्य करने से बचना चाहिए।
नया व्यापार और बड़ा निवेश- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र अस्त की अवधि के दौरान नए कारोबार की शुरुआत भी नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा कोई आर्थिक निवेश भी न करें। ऐसा माना जाता है कि इन वर्जित कामों को करने से व्यक्ति को जीवन में आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
शुभ संस्कार- हिंदू धर्म के प्रमुख संस्कार जैसे मुंडन, उपनयन, नामकरण या विद्यारंभ भी शुक्र के उदित होने तक नहीं किए जाते हैं। इन कामों को करने से व्यक्ति को जीवन में अशुभ परिणाम मिलते हैं।
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