यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 03, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Shukra Asta: जानिए शुक्र अस्त होने के बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को करने की क्यों है मनाही
Shukra Asta हिंदू धर्म में शुक्र ग्रह का काफी अधिक महत्व है। किसी भी मांगलिक कार्य को करने से पहले ...और पढ़ें

नई दिल्ली, Shukra Asta Meaning: हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य को करने से पहले मुहूर्त का जरूर ध्यान रखा जाता है। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में कार्य करने से उस काम में सफलता जरूर मिलती है। फिर चाहे वह विवाह, गृह प्रवेश हो या फिर मंदिर निर्माण हो। ऐसे ही हिंदू धर्म में विवाह जैसे मांगलिक कार्य को करने से पहले शुक्र की स्थिति जरूर देखी जाती है।
शुक्र ग्रह को धन, ऐश्वर्य, संपन्न, आकर्षण, सुंदरता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए अगर शुक्र अस्त होता है, तो विवाह, सगाई आदि करने की पूर्ण रूप से मनाही होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर शुक्र की स्थिति के बाद ही विवाह का मुहूर्त क्यों निर्धारित किया जाता है। जानिए शुक्र अस्त होने पर विवाह करने की क्यों है मनाही।
शुक्र ग्रह की पौराणिक कथा
शास्त्रों में शुक्र ग्रह को ब्राह्मण, विद्वान और शुक्राचार्य के रूप में जाने जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, शुक्राचार्य ऋषि भृगु और पुलोमा के पुत्र थे। शुक्र को भगवान शिव से संजीवनी विद्या का ज्ञान दिया था, जिससे वह मृत लोगों को आसानी से जीवित कर सकते हैं। शुक्राचार्य से खुश कर भगवान शिव ने उन्हें ग्रहों में सबसे श्रेष्ठ होने का आशीर्वाद दे दिया। इसके साथ यह भी कहा कि शुक्र के आकाश में उदय होने पर ही शुभ और मांगलिक कार्य करना शुभ होगा। इसी कारण शुक्र ग्रह के उदय होने पर शादी-विवाह के काम किए जाते हैं।
कब होता है शुक्र अस्त?
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार सूर्य और शुक्र की युति 18 महीने में 2 बार होती है। सूर्य अपनी शक्ति से शुक्र को ओझल सा कर देता है। इसी कारण इसे अस्त कहा जाता है।
शुक्र क्यों होता है अस्त?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र ग्रह को सांसारिक और भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। इसलिए शुक्र अस्त होने पर कुछ कामों पर रोक लगा दी जाती है। विशेषकर मांगलिक कार्यों में विराम लग जाता है। क्योंकि जब कोई ग्रह सूर्य के करीब आ जाता है, तो वह ग्रह कमजोर पड़ने लगता है। ऐसे में उस ग्रह के सकारात्मक प्रभाव समाप्त होने लगते हैं। इसी कारण इसे अस्त कहते हैं। शुक्र की बात करें, तो इसे भोर का तारा कहा जाता है। जब ये सूर्य के पास आता है, तो इसकी ऊर्जा काफी कमजोर हो जाती है और दिखाई देना बंद कर देता है। इसी कारण इसे शुक्र कहते हैं।
शुक्र अस्त में क्यों नहीं करते है विवाह?
शुक्र अस्त होने के बाद विवाह जैसे मांगलिक काम जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर रोक लग जाती है। माना जाता है कि शुक्र अस्त के समय विवाह करने से कुछ समय के बाद ही रिश्तों में खटास उत्पन्न हो जाती है।
शुक्र के अस्त होने से शादी टूटने तक की नौबत आ जाती है। इतना ही जीवनसाथी की तरक्की और सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए शुक्र अस्त होने पर विवाह करने की मनाही होती है।
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