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29 अक्‍टूबर तक अस्‍त है शुक्र ग्रह, इन 3 शुभ कामों पर लग गया है ब्रेक; करेंगे तो होगा भारी नुकसान

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:01 AM (IST)

हिंदू धर्म में शुक्र ग्रह को सुख, वैभव, प्रेम, वैवाहिक जीवन और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र ...और पढ़ें

29 अक्टूबर तक शुक्र अस्त । (Picture Credit- AI Generated)

29 अक्टूबर तक शुक्र अस्त । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले ग्रहों की स्थिति और शुभ मुहूर्त को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वहीं, कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं, जब विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक है शुक्र ग्रह का अस्त होना।

उज्‍जैन के ज्‍योतिषाचार्य एंव पंडित मनीष शर्मा बताते हैं, " 12 अक्‍टूबर से 29 अक्‍टूबर तक शुक्र ग्रह अस्‍त है। शुक्र का उदय 29 अक्‍टूबर को शाम 6 बजे के बाद होगा। शुक्र को सुख-सुविधाओं, प्रेम, वैवाहिक जीवन और भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। जब शुक्र ग्रह सूर्य के बहुत करीब आ जाते हैं, तो उनकी दृश्यता कम हो जाती है। इस स्थिति को शुक्र का अस्त होना कहा जाता है।"

शुक्र के अस्त होने पर न करें विवाह

हिंदू धर्म में विवाह को जीवन के सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है। विवाह के लिए तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र ग्रह का संबंध प्रेम, दांपत्य सुख और वैवाहिक जीवन से माना जाता है।

इसी वजह से शुक्र के अस्त होने पर विवाह जैसे मांगलिक कार्य करने की मनाही मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में विवाह करने के बजाय शुक्र के उदय होने और शुभ मुहूर्त मिलने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हालांकि, विवाह की तिथि तय करने से पहले किसी योग्य पंडित से पंचांग के अनुसार सलाह लेना उचित रहता है।

शुक्र के अस्त होने पर न करें गृह प्रवेश

नए घर में प्रवेश करना हर व्यक्ति के लिए एक खास अवसर होता है। लोग चाहते हैं कि उनके नए घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। इसके लिए गृह प्रवेश से पहले पूजा-पाठ और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाता है।

पंडित मनीष शर्मा के अनुसार, शुक्र के अस्त होने पर गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इस अवधि में नए घर में प्रवेश करने के बजाय शुक्र के उदय होने तक इंतजार करना चाहिए।

मंदिर की स्थापना और प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा से बचें

हिंदू धर्म में मंदिर की स्थापना और देवी-देवताओं की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इन धार्मिक कार्यों को करने के लिए विशेष शुभ मुहूर्त निकाला जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र के अस्त होने पर मंदिर की स्थापना और प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा जैसे मांगलिक कार्यों को टाल देना चाहिए। ऐसे कार्यों के लिए शुक्र के उदय होने के बाद शुभ मुहूर्त का चयन किया जा सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।