अक्टूबर 2026 में बन रहा है दुर्लभ ‘संधि काल’; जानें नए घर में कदम रखने के 4 सबसे शुभ मुहूर्त
अक्टूबर 2026 में गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त और महत्वपूर्ण तिथियां बताई गई हैं। नए घर में प्रवेश से ...और पढ़ें

अक्टूबर 2026 गृह प्रवेश तिथियां

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अपना खुद का नया घर बनाने का सपना हर कोई देखता है। ऐसे में अगर आप भी अक्टूबर 2026 में अपने नए घर में प्रवेश करने की योजना बना रहे हैं तो शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, नए घर में जाने से पहले गृह प्रवेश करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और जीवन में शांति बनी रहती है। इसके अलावा मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए ज्योतिषी से जानते हैं अक्टूबर 2026 में किस दिन गृह प्रवेश करना सही रहेगा?
अक्टूबर में कब-कब है गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त?
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, अक्टूबर महीने में गृह प्रवेश के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार आश्विन व कार्तिक मास के संधि काल में गृह प्रवेश करना शुभ माना गया है।
अक्टूबर महीने की शुभ तिथियां
इस महीने गृह प्रवेश के लिए 16, 21, 26 और 30 तारीख की तिथियां निकल रही हैं। इन तिथियों में आप नए घर में गृह प्रवेश की पूजा संपन्न कर सकते हैं। इसके अलावा इन तिथियों में भी 21, 26 और 30 तारीख को गृह प्रवेश करना अत्यधिक शुभ और कल्याणकारी रहेगा।
अक्टूबर 2026 गृह प्रवेश शुभ मुहूर्त कैलेंडर
| गृह प्रवेश की तिथि | दिन | शुभ मुहूर्त |
| 16 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक |
| 21 अक्टूबर 2026 | बुधवार | सुबह 8:24 मिनट से 11:23 मिनट तक |
| 26 अक्टूबर 2026 | सोमवार | सुबह 8:34 मिनट से 11:55 मिनट तक |
| 30 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | सुबह 8:14 मिनट से 11:33 मिनट तक |
गृह प्रवेश के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान
गृह प्रवेश करने से पहले इस बात को सुनिश्चित कर लें कि, घर पूरी तरह से तैयार हो। यानी अब घर में रहने और बसने के लिए तैयार होना चाहिए। माना जाता है कि, अधूरे घर में गृह प्रवेश करने से सिर्फ आधी संरचना ही शुद्ध होती है। वास्तु शास्त्र में इसे समस्या का कारण माना जाता है।
गृह प्रवेश की पूजा हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए। ऐसा करने से पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़कर मिलता है।
गृह प्रवेश वाली पूजा की रात परिवार के सदस्यों को घर में ही सोना चाहिए। इससे घर के साथ एक आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने में मदद मिलती है।
अखंड जोत और दीया करीब 24 से 48 घंटे तक जरूर जलाकर रखना चाहिए।
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