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शुक्र अस्त होने पर क्यों नहीं होते शादी-व्याह जैसे मांगलिक कार्य? इस रहस्य के बारे में नहीं जानते होंगे आप

Published: Tue, 29 Sep 2026 09:00 AM (IST)

शुक्र अस्त होने पर विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि शुक्र को वैवाहिक सुख और प्रेम ...और पढ़ें

शुक्र अस्त: जानें क्यों इस दौरान नहीं होते शादी-विवाह  (Picture Credit: AI Generated)

शुक्र अस्त: जानें क्यों इस दौरान नहीं होते शादी-विवाह  (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. शुक्र वैवाहिक सुख और प्रेम का कारक ग्रह माना जाता है।

  2. अस्त शुक्र की ऊर्जा कम होने से वैवाहिक जीवन में समस्याएं।

  3. शादी के साथ मुंडन, सगाई जैसे कार्य भी इस दौरान वर्जित।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शादी एक ऐसा अवसर होता है जिसका हर लड़के और लड़की को बेसब्री से इंतजार होता है। यह एक ऐसा पल होता है जब दो लोगों नहीं बल्कि दो परिवारों का भी मेल होता है।

सभी चाहते हैं कि दूल्हे और दुल्हन के भविष्य में शादी से जुड़ी कोई समस्या न आए और दोनों हमेशा वैवाहिक जीवन में सुखी रहें। इसी वजह से शादी के लिए हमेशा शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जाता है।

ज्योतिष में शादी के मुहूर्त के साथ इस बारे में भी बताया जाता है कि ग्रहों की चाल के अनुसार कौन सा समय शादी के अनुकूल है और कौन सा विपरीत।

आपने घर के बड़ों को ऐसा कहते हुए सुना होगा कि शुक्र अस्त होने पर शादी नहीं करनी चाहिए। इसी वजह से साल के कुछ विशेष समय में शादी और इससे जुड़ी रस्मों की मनाही होती है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्यों शुक्र ग्रह के अस्त होते ही मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है?

शुक्र अस्त होने पर शादी के कार्यक्रमों पर रोक क्यों?

शुक्र को एक बहुत ही शुभ ग्रह माना जाता है और इसे सांसारिक सुख-सुविधाओं, प्रेम और वैवाहिक जीवन से जोड़ा जाता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र की स्थिति शुभ स्थान पर होती है, तो उसके वैवाहिक जीवन में कोई समस्या नहीं आती है।

ऐसे ही साल में कुछ विशेष महीनों में शुक्र ग्रह अस्त होता है यानी कि इसका प्रकाश हमेशा की तुलना में मध्यम हो जाता है। यदि इस दौरान शादी जैसे शुभ काम किए जाते हैं तो शुक्र की पूर्ण ऊर्जा नहीं मिलती है, जिससे वैवाहिक जीवन में आगे चलकर समस्याएं हो सकती हैं। इस विशेष कारण से ही शादी के साथ मुंडन, सगाई, गृह प्रवेश जैसे काम भी इस दौरान न करने की सलाह दी जाती है।

शुक्र अस्त क्या होता है?

शुक्र अस्त को तारा डूबना भी कहा जाता है। यह ग्रह अस्त अवस्था में कुछ समय के लिए इसलिए चला जाता है, क्योंकि सौर मंडल के सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं और जब ये सूर्य के सबसे नजदीक होते हैं तब सूर्य के प्रकाश के सामने इनका प्रकाश धूमिल होने लगता है।

इसी वजह से जब शुक्र ग्रह सूर्य के निकटतम होता है तब इसकी रोशनी भी कम हो जाती है और कुछ समय के लिए यह आसमान में दिखाई नहीं देता है। दूर से यह ग्रह किसी तारे के समान नजर आता है और इसकी रोशनी सुबह के समय भी दिखाई देती है, इसी वजह से इसे भोर का तारा भी कहा जाता है। इसी वजह से जब यह अस्त अवस्था में होता है तो इसे तारा डूबना भी कहा जाता है।

साल के कितने दिनों में शुक्र अस्त अवस्था में होते हैं?

ज्योतिष के अनुसार पूरे साल में लगभग 50 से 60 दिनों के लिए शुक्र अस्त अवस्था में होते हैं। इस साल 2026 में शुक्र 23 सितंबर अस्त अवस्था में चले गए हैं और लगभग 37 दिनों तक अस्त अवस्था में ही रहेंगे।

इसके बाद अक्टूबर के महीने में 30 तारीख को शुक्र फिर से उदय होंगे। शुक्र की अस्त अवस्था में शादी जैसे मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं और इसका राशियों पर भी प्रभाव होता है। शुक्र की अस्त अवस्था में आने की वजह से आने वाले कुछ दिनों में शादी या अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है और इसी वजह से सितंबर और अक्टूबर में शादी की कोई शुभ तिथि नहीं है।

शुक्र अस्त होने पर विवाह न करने के कई कारणों में से एक माना जाता है वैवाहिक जीवन में शुक्र का आशीर्वाद न मिलना। इसी वजह से जब शुक्र अस्त होते हैं तो शादी की रस्मों की मनाही होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।