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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 31, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rajasthan: किडनैपर से लिपटकर जोर-जोर से रोने लगा मासूम, 14 माह पहले किया गया था अगवा

Published: Sat, 31 Aug 2024 05:45 AM (IST)Updated: Sat, 31 Aug 2024 08:02 AM (IST)

राजधानी जयपुर से करीब 14 महीने पहले अगवा किए गए बच्चे को अब जयपुर पुलिस ने बरामद कर लिया है। ...और पढ़ें

किडनैपर से लिपटकर जोर-जोर से रोने लगा मासूम
किडनैपर से लिपटकर जोर-जोर से रोने लगा मासूम

HighLights

  1. बच्चे को अगवा करने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस का हेड कांस्टेबल गिरफ्तार
  2. 11 जून, 2023 को हुआ था 11 माह के बच्चे का अपहरण, अब किया गया बरामद

 जागरण संवाददाता, जयपुर। राजधानी जयपुर से करीब 14 महीने पहले अगवा किए गए बच्चे को अब जयपुर पुलिस ने बरामद कर लिया है। पुलिस ने बुधवार को बच्चे को अगवा करने वाले से लेकर उसकी मां को सौंपा चाहना तो थाने में अजीब सा दृश्य देखने को मिला।

बच्चा अगवा करने वाले से ही लिपटकर रोने लगा, वह उसको छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। तब अगवा करने वाले की भी आंखों में आंसू आ गए। बाद में पुलिस ने बच्चे को अपहरण करने वाले से लेकर उसे मां को सुपुर्द कर दिया।

एक साल तक अपहरणकर्ता के पास रहा बच्चा

करीब एक साल तक अपहरण करने वाले के पास रहने के कारण बच्चे का उससे काफी लगाव हो गया। जयपुर पुलिस ने बच्चे को अगवा करने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के हेड कांस्टेबल तनुज चाहर को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस उपायुक्त दिगंत आनंद ने बताया कि आरोपित तनुज ने 11 जून, 2023 को 11 महीने के बच्चे का अपहरण किया था। तीन दिन बाद 14 जून को थाना सांगानेर सदर में बच्चे के माता-पिता ने उसके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।

आरोपी तनुज को उत्तर प्रदेश के गोंडा से गिरफ्तार किया

रिपोर्ट में कहा गया कि उनके घर चार आदमी आए थे, जिनमें मां का एक परिचित तनुज भी था। ये ही चारों उसके बच्चे को उठाकर ले गए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने बच्चे की तलाश की, लेकिन सफलता मिली।

उन्होंने बताया कि आरोपित तनुज की तलाश जारी थी, बुधवार को सफलता मिली, पुलिस ने तनुज को उत्तर प्रदेश के गोंडा से गिरफ्तार किया है। तनुज और बच्चे को लेकर पुलिस गुरुवार को जयपुर पहुंची।

अपहरणकर्ता बच्चे को अपना बेटा मानता है

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि तनुज बच्चे को अपना बेटा मानता है, वह बच्चे का अपहरण करने के लिए नौ महीने तक जयपुर में रहा। बच्चे का अपहरण करने के बाद तनुज अपनी पहचान छिपाने के लिए साधु बनकर रहा।