उदयपुर, सुभाष शर्मा। राजस्थान में हिमाचल और उत्तराखंड जैसा अहसास करना है तो एक बार गोरमघाट की यात्रा करना बेहद जरूरी है। बारिश होते ही उदयपुर और आसपास क्षेत्र में अरावली की पहाड़ियां इसका अहसास कराती है। एक बार जिसने बारिश के मौसम में गोरमघाट की यात्रा कर ली, उसके बाद उसका मन दोबारा ही नहीं,

बल्कि बार-बार यहां जाने का करेगा। यहीं है राजस्थान में सबसे ऊंचाई से गिरने वाला झरना भील बेरी का झरना।

उदयपुर शहर से करीब 136 किलोमीटर दूर गोरमघाट, रावली टॉडगढ़ अभयारण्य की प्राकृतिक छटा और इसके मध्य जोगमंडी वाटर फॉल देखकर हर कोई रोमांचित हो उठता है। यहां मीटर गेज पर धीमी गति से चलने वाली सात डिब्बों वाली मावली-मारवाड़ ट्रेन ही रोमांच का सफर करवाती है। मानसून शुरू होते ही यह ट्रेन गोरमघाट के रेलवे स्टेशन खामली घाट तक जाती है और इसमें रोमांचक सफर करने वाले पर्यटक ही देखने को मिलते हैं। ब्रिटिश काल के समय का ट्रैक और उस पर से होकर गुजरती मीटर गेज ट्रेन मावली रेलवे स्टेशन से रवाना होकर देवगढ़ क्षेत्र के खामली घाट रेलवे स्टेशन पहुंचती है।

यहां से यह ट्रेन जब घने जंगल और पहाडिय़ों के बीच सर्पिलाकार रास्तों से होते हुए ब्रिटिश काल के समय बने ब्रिज के ऊपर से गुजरती है तो ऐसा नजारा पेश करती है कि उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। हर पर्यटक यहां के नजारों को कैमरों में कैद करना चाहता है। कहीं तेज तो कहीं धीमी गति से चलती ट्रेन ब्रिटिशकालीन ऊंचाई वाले पुलों और रास्ते में पडऩे वाली दो टनलों से होकर भी गुजरती है तो रोमांच और बढ़ जाता है।

आने-जाने के लिए इकलौता साधन है मीटर गेज की ट्रेन गोरम घाट की एक बड़ी खासियत यह भी है कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ ही यहां तक जाने और वहां से लौटने के लिये यह मीटर गेज ट्रेन एक मात्र साधन है। जिस किसी पर्यटक को गोरम घाट क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती देखनी है तो उसे इसी मीटर गेज ट्रेन का सफर करना होगा। जो भी इस ट्रेन से उदयपुर या राजसमंद की तरफ से गोरम घाट जाता है उसको वापसी के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब यहीं ट्रेन वापस मिलती है। इसके बावजूद यहां मानसून में हजारों पर्यटक गोरमघाट पहुंचते हैं।

भील बेरी का झरना

गोरमघाट की यात्रा के दौरान पर्यटक राजस्थान में सबसे अधिक ऊंचाई से गिरने वाले भील बेरी का झरना देखना भी नहीं भूलते। यह झरना कर्नाटक और गोवा राज्य की सीमा पर स्थित दूध सागर झरने जैसा दिखाई पड़ता है। इसके अलावा जोगमंडी वाटर फॉल का नजारा हिमाचल से कम नहीं। हर साल वन विभाग ने भी पर्यटकों के लिए विशेष ट्यूर पैकेज बनाकर यहां देशी-विदेशी पर्यटकों को यात्रा कराता है। उनके साथ वन विभाग और गाइड़ों की भी टीम होती है, जो उन्हें टॉडगढ़ अभयारण्य में पाए जाने वाले वन्यजीव, पक्षियों की जानकारी देते हैं साथ ही गाइड रेलवे लाइन तथा ब्रिटिशकाल में बनाए गए पुलों का इतिहास बताता है।

Posted By: Preeti jha

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