सुप्रीम कोर्ट को बताई किसानों की भावनाएं, जगजीत सिंह डल्लेवाल ने भेजा ई-मेल; डाक और फैक्स से भी भेजा पत्र
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने MSP गारंटी कानून और अन्य मांगों से जुड़े दस्तावेज सबूत और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की भावनाओं को सुप्रीम कोर्ट को भेजा है। डल्लेवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश की थी लेकिन उनका स्पीकर बंद कर दिया गया था। SKM ने केंद्र सरकार पर नई खेती मंडीकरण नीति लागू करने का आरोप लगाया है।
जागरण संवाददाता, संगरूर। Farmers Protest Update: संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) से जुड़े किसान संगठनों की संयुक्त बैठक शुक्रवार को खनौरी में हुई।
बैठक में लिए गए फैसले के बाद एमएसपी गारंटी कानून व अन्य 13 मांगों संबंधी समय-समय पर केंद्र सरकारों द्वारा किए गए वादों संबंधी दस्तावेज, सबूत व आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की भावनाओं को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ई-मेल, फेक्स व डाक के जरिये भेजा गया।
बैठक के बाद किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने स्पष्ट किया कि वीरवार को डल्लेवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखनी चाही थी। लेकिन उनका स्पीकर बंद कर दिया गया। ऐसे में अब डल्लेवाल ने ई-मेल के जरिये सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष भेजा गया है।
किसानों की भावनाओं से भरा पत्र
यह केवल उनकी मांगें या समय-समय पर सरकारों द्वारा वादे के बाद की गई वादा खिलाफी के सबूत, रिकॉर्ड, गत दिवस संसद की स्थायी कमेटी द्वारा एमएसपी संबंधी की गई सिफारिश की रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि जगजीत सिंह डल्लेवाल सहित किसानों की भावनाओं भरा पत्र है।
किसान नेता लखविंदर सिंह औलख, गुरविंदर सिंह भंगू ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार नई खेती मंडीकरण नीति का खरड़ा राज्य सरकारों को भेजकर इसे लागू करने की फिराक में हैं। ऐसे में राज्य सरकारों को इसका विरोध करना चाहिए।
अस्थायी अस्पताल के आदेश को को सिरे से नकारा
पंजाब व हरियाणा सरकार तुरंत इमरजेंसी विधानसभा सेशन बुलाकर नई खेती मंडीकरण नीति के खरड़े को रद करे। साथ ही शुक्रवार को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पंजाब सरकार को किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को अस्थायी अस्पताल में उपचार के लिए शिफ्ट करने के दिए आदेश पर टिप्पणी करते कहा कि जगजीत सिंह डल्लेवाल ने इसके लिए सिरे से इनकार किया है।
डल्लेवाल का कहना है कि वह किसी कीमत पर भी मेडिकल सेवा नहीं देंगे व न ही अस्थायी अस्पताल में शिफ्ट होंगे। सुप्रीम कोर्ट अगर उनकी सेहत को लेकर चिंतित है तो जल्द से जल्द किसानों की मांगों को पूरा करने के आदेश केंद्र सरकार को जारी करे।
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