Punjab News: अस्पताल में महिलाओं को चढ़ रहा था ग्लूकोज, अचानक बिगड़ने लगी तबीयत; हॉस्पिटल में मचा हड़कंप
संगरूर के सिविल अस्पताल में गुरुवार को एक गंभीर घटना सामने आई जब प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं को ग्लूकोज चढ़ाने के बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। करीब 14-15 महिलाओं को कपकपी बेहोशी और चमड़ी लाल होने जैसी शिकायतें हुईं। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एंटी इंफेक्शन डोज दी और स्लाइन ग्लूकोज के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।
जागरण संवाददाता, संगरूर। अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल (Guru Nanak Dev Hospital Amritsar) में वीरवार को नार्मल स्लाइन ग्लूकोज चढ़ाने से मरीजों की सेहत बिगड़ने के मामले के बाद दूसरा मामला सिविल अस्पताल संगरूर (Civil Hospital Sangroor) के गायनी वार्ड में सामने आया। जहां डिलीवरी के बाद भर्ती महिलाओं को जब स्लाइन ग्लूकोज लगाया गया तो एक के बाद एक मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
14-15 महिलाओं को आई ये समस्या
ग्लूकोज लगने से कपकपी आने, मरीज बेसुध होने, चमड़ी लाल होने जैसे शिकायतें आई। करीब 14-15 महिलाओं को यह समस्या पेश आई। इन सभी की डिलीवरी हो चुकी थी। ऐसे मामले सामने आते ही अस्पताल स्टाफ व डॉक्टरों के हाथ-पैर फूल गए। तुरंत ही इन्हें एंटी इंफेक्शन डोज दी गई तथा अस्पताल में मौजूद स्लाइन ग्लूकोज का इस्तेमाल तुरंत रोक दिया गया।
मरीजों को ऑक्सीजन लगाई गई व शाम तक स्थिति काबू में कर ली गई। यह मामला सामने आने के बाद पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव कुमार राहुल, हलका विधायक नरिंदर कौर भराज ने भी सिविल अस्पताल का दौरा करके स्थिति का जायजा लिया।
प्रमुख सचिव ने किया अस्पताल का दौरा
प्रमुख सचिव कुमार राहुल ने सिविल अस्पताल संगरूर का दौरा करके गायनी वार्ड में भर्ती महिला मरीजों के स्वास्थ्य की समीक्षा की। उन्होंने वार्ड में मौजूद मरीजों के परिजनों व डॉक्टरों से बात की। इस उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते कहा कि उन्होंने वहां भर्ती 14 मरीजों से बात की है व वह सभी ठीक हैं।
उन्होंने बताया कि नॉर्मल स्लाइन ग्लूकोज लगाने के कारण तीन मरीजों को शुरुआत में कुछ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आईं, लेकिन मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने उनका इलाज किया और किसी भी मरीज को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ी।
जांच के लिए भेजे गए नमूने
प्रमुख सचिव ने बताया कि पंजाब के सभी अस्पतालों में इस बैच से संबंधित नॉर्मल सलाइन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज रहे हैं, जिसके नतीजे अगले दो-तीन दिन में आने की संभावना है। यदि नमूने अयोग्य पाए गए तो संबंधित आपूर्तिकर्ता, फर्म के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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