एक एसएमओ के हवाले 100 गांवों की सेहत का जिम्मा
काठगढ़ इस क्षेत्र के आसपास लगने वाले गांवों की रोजाना खरीदारी का केंद्र है। यहां पर सरकार द्वारा खोला गया सरकारी अस्पताल अब सफेद हाथी बनकर रह गया है। ...और पढ़ें

सतीश शर्मा, काठगढ़: काठगढ़ इस क्षेत्र के आसपास लगने वाले गांवों की रोजाना खरीदारी का केंद्र है। यहां पर सरकार द्वारा खोला गया सरकारी अस्पताल अब सफेद हाथी बनकर रह गया है। एक एसएमओ पर सौ गांवों की सेहत सुविधा का जिम्मा है। अस्पताल में पूरा स्टाफ नहीं हैं। लोगों को मजबूरन रोपड़-बलाचौर या नवांशहर के अस्पतालों में जाना पड़ता है। अकाली-भाजपा के कार्यकाल में लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए इस अस्पताल का नींव पत्थर और उद्घाटन पूर्व सेहत मंत्री पंजाब सुरजीत कुमार ज्याणी ने रखा था। उस समय केंद्र में मनमोहन की सरकार थी, तो दोनों ही पार्टियां इस पर अपना-अपना हक दिखा रही थी। अब दोनों ही खामोश हैं। कैप्टन सरकार भी सेहत सुविधा प्रदान करने में असफल सिद्ध हो रही है। आप नेता सतनाम जलालपुर ने बतया कि लाकडाउन में यह अस्पताल तीन महीने बंद रहा, जबकि इसका खुला रहना जरूरी था। जनता रोजाना बिना डाक्टर के बंद अस्पताल को देखकर परेशान थी। राणा कर्ण सिंह ने कहा कि अकाली-भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां जनता को सेहत सुविधा प्रदान करने में फेल साबित हुई हैं। पंजाब में इन पार्टियों का अब काफी बुरा हाल चल रहा है। जनता अब इनको नकार रही हैं। पूर्व सरपंच जोगिदर पाल दत्ता ने कहा कि इस बारे में कई बार लिखकर भेजा परंतु, कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं इस बारे में सरकारी अस्पताल काठकगढ़ के एसएमओ डा. गुरिदरजीत सिंह ने कहा कि वह यहां अकेले कामकाज देख रहे हैं। साथ में एक महिला डेंटल डाक्टर है, वह बलाचौर भी कुछ दिन जाती है। सरकार के काम की बैठकें भी भी अटेंड करनी पड़ती हैं। यहां पर एक डाक्टर और जरूर होना चाहिए।

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