लुधियाना में स्टील की कीमतों में भारी उछाल, 15 दिन में 3500 रुपये प्रति टन हुई महंगी
लुधियाना में स्टील की कीमतों में लगातार वृद्धि उद्योग जगत के लिए चिंता का विषय बन गई है। पिछले पंद्रह दिनों में स्टील के दाम 3,500 रुपये प्रति टन बढ़ ...और पढ़ें

लुधियाना में 15 दिन में 3500 रुपये प्रति टन हुई महंगी (File Photo)
मुनीश शर्मा, लुधियाना। देश में स्टील की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने उद्योग जगत की चिंता बढ़ा दी है। बीते पंद्रह दिन में स्टील के दामों में करीब 3,500 रुपये प्रति टन की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके पीछे केंद्र सरकार की ओर से स्टील उत्पादों के आयात पर ड्यूटी लगाने की संभावित तैयारी, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और घरेलू सप्लाई में कटौती जैसे कई कारण सामने आ रहे हैं। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार स्टील आयात पर ड्यूटी लगाने की चर्चाओं से बाजार में पहले ही सट्टा और अस्थिरता बढ़ गई है।
घरेलू कीमतों पर पड़ेगा असर
कारोबारी आशंका जता रहे हैं कि ड्यूटी लागू होने के बाद आयातित स्टील और महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ेगा। इसी वजह से पिछले कुछ दिनों में स्टील की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।
दूसरी ओर, डालर की मजबूती ने भी हालात को और गंभीर बना दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते दो महीने में डालर में लगभग छह प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी अवधि में स्टील की कीमतें करीब आठ प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।
चूंकि स्टील के कच्चे माल और आयातित उत्पादों का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा पर निर्भर करता है, इसलिए डालर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर स्टील के दामों पर पड़ रहा है। उद्योग जगत का तर्क है कि स्टील आटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं सहित कई क्षेत्रों का प्रमुख कच्चा माल है।
ऐसे में स्टील की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी का असर सीधे तैयार उत्पादों की लागत पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। यदि कीमतों की स्थिति जल्द स्पष्ट और स्थिर नहीं हुई, तो इसका व्यापक असर देश की औद्योगिक वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता पर भी पड़ सकता है।

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