लुधियाना में खेल केंद्रों से कब्जे हटाएगा नगर निगम, टेंडर लगाने के लिए एफएंडसीसी की मीटिंग में बनाई कमेटी
निगम ने खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए करोड़ों की लागत से शहर में चार खेल केंद्र बनाए हैं। इनमें लैय्यर वैली में स्केटिंग रिंग गुरु नानक स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट रखबाग में स्वीमिंग पूल व उसके पीछे वेट लिफ्टिंग सेंटर हैं।

वरिंदर राणा, लुधियाना। नगर निगम के तीन खेल केंद्रों को कब्जा मुक्त करने के लिए अब अधिकारी तैयारी में जुट गए हैं। यहां पर बिजली बिल से लेकर रखरखाव का खर्च निगम कर रहा है, जबकि केंद्र पर कब्जा जमाकर बैठे लोग खिलाड़ियों से हर माह फीस वसूल कर रही है। अहम बात है कि इन पैसों में से निगम को कुछ नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि अब निगम के अधिकारी इन केंद्रों को निजी कंपनी या ठेकेदार को सौंपने की तैयारी में है, ताकि इससे मिलने वाले राजस्व से निगम की वित्तीय हालत में कुछ सुधार हो सके।
दरअसल, निगम ने खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए करोड़ों की लागत से शहर में चार खेल केंद्र बनाए हैं। इनमें लैय्यर वैली में स्केटिंग रिंग, गुरु नानक स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट, रखबाग में स्वीमिंग पूल व उसके पीछे वेट लिफ्टिंग सेंटर हैं। स्केटिंग रिंग पर निगम ने हाल ही में 99.56 लाख रुपये खर्च किए हैं, जबकि बैडमिंटन कोर्ट को दोबारा तैयार करने के लिए निगम दो करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। यहां रखरखाव की जिम्मेदारी निगम की है, जबकि इससे कोई आय नहीं हो रही है। ऐसे में अब निगम ने इन केंद्रों को ठेके पर देने के लिए कमेटी बनाई है। जल्द ही इसे ठेके पर दिया जा सकता है।
खेल केंद्रों को कंपनियों व ठेकेदारों को सौंपने का प्रस्ताव एफएंडसीसी कमेटी के पास आया था। इस मुद्दे पर एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी तय करेगी कि कितना रुपये का ठेका तय किया जाना है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इसका टेंडर जारी किया जाएगा। ये योजना सफल हो गई तो निगम को राजस्व मिलेगा। - आदित्या डेचवाल, एडिशनल कमिश्नर
निगम के स्केटिंग रिंग से कोच कर रहा कमाई
निगम जोन डी के पास लैय्यर वैली में निगम ने स्केटिंग रिंग बनाया हुआ है। कुछ समय पहले ही निगम ने स्केटिंग रिंग को दोबारा तैयार करने के लिए 99.56 लाख रुपये खर्च किए हैं। यहां पर एक कोच सुबह-शाम युवाओं को ट्रेनिंग दे रहा है। इस ट्रेनिंग के बदले हर माह प्रति छात्र एक हजार रुपये भी लिए जा रहे हैं, लेकिन इसमें से निगम को कुछ हासिल नहीं हो रहा है। जबकि इस रिंग पर होने वाले सभी खर्च नगर निगम की तरफ से किए जाते हैं।
बैडमिंटन कोर्ट पर एसोसिएशन का कब्जा
निगम ने गुरु नानक स्टेडियम के शास्त्री हाल में बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण करवाया गया। अब स्मार्ट सिटी के फंड से इस कोर्ट को दोबारा तैयार किया जा रहा है और दो करोड़ रुपये खर्चे जा रहे हैं। यहां पर एक एसोसिएशन का कब्जा है, जो यहां आने वाले खिलाड़ियों से हर माह फीस लेती है। इसमें भी निगम को एक पैसा नहीं मिलता है। बैडमिंटन कोर्ट के बिजली बिल के अलावा अन्य खर्च निगम खजाने से किए जा रहे हैं।
वेट लिफ्टिंग सेंटर के कब्जे पर हुआ था विवाद
वेट लिफ्टिंग सेंटर का भी कुछ इसी तरह का हाल है। स्वीमिंग पूल के ठीक पीछे लंबे समय से यह सेंटर चल रहा है। इस सेंटर को भी निगम ने तैयार किया था। इस सेंटर पर भी एक निजी संस्था की तरफ से कब्जा जमाया हुआ है। इस सेंटर पर कब्जे को लेकर कुछ समय विवाद भी हुआ था। यह मामला पुलिस के पास भी पहुंच गया था। इस सेंटर के बिजली खर्च के अलावा रखरखाव का खर्च निगम की तरफ से किया जा रहा है।
केवल स्वीमिंग पूल से होती है कमाई
रखबाग में भी निगम ने स्वीमिंग पूल का निर्माण किया हुआ है। इस स्वीमिंग पूल को निगम की तरफ से चलाया जा रहा है। यहां पर आने वाले लोगों के लिए निगम ने कोच का प्रबंध भी कर रखा है। यहां प्रत्येक व्यक्ति से फीस निगम की तरफ से वसूल की जा रही है। इसका भी पूरा खर्च निगम के खजाने पर आता है। इस स्वीमिंग पूल को कई कंपनी पर ठेकेदार लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन निगम इसके संचालन खुद कर रहा है। अगर निगम इसे किसी कंपनी या ठेकेदार को देती है तो मरम्मत से खर्च और बिजली बिल के बोझ से बच सकता है।
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