जासं, लुधियाना। पक्षपात, भाई-भतीजावाद के आरोपों के बीच स्थानीय अदालत ने राज्य सरकार और भाषा विभाग पंजाब को दाे अगस्त, 2021 तक शिरोमणि साहित्यकार अवार्ड के लिये चयनित उम्मीदवारों को पुरस्कार प्रदान करने पर रोक लगा दी है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) हसनदीप सिंह बाजवा की अदालत ने कहा, "खासकर जब इन पुरस्कारों की घोषणा दिसंबर 2020 के महीने में की गई है और उन्हें आज तक नहीं दिया गया है ”। अदालत ने पूर्व जिला अटॉर्नी मित्तर सेन गोयल उर्फ मित्तर सेन मीत, हरबख्श सिंह ग्रेवाल और लुधियाना के राजिंदर पाल सिंह द्वारा दायर एक केस में यह आदेश पारित किया है।

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2020 में राज्य सलाहकार बोर्ड के गठन को भी चुनाैती

इन व्यक्तियों ने दावा किया है कि वे पंजाबी भाषा प्रसार भाईचारा के साथ जुड़े हुए हैं। जोकि कनाडा में पंजीकृत एक गैर सरकारी संगठन है। इसकी भारत सहित विदेश भर में इकाइयां हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनका संगठन पंजाबी भाषा, साहित्य, संस्कृति और लोकाचार को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। जिसका एकमात्र उद्देश्य इसे संरक्षित करना और इसका विस्तार करना है। इन व्यक्तियों ने 2020 में राज्य सलाहकार बोर्ड के गठन को भी नियमों के अनुरूप नहीं बताते हुए चुनौती दी थी।

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2020 में भाषा विभाग ने 18 अलग-अलग वर्गों के लिए किया था पुरस्कारों का ऐलान

पंजाब सरकार के भाषा विभाग ने 2020 में 18 अलग-अलग वर्गों के लिए साहित्य रत्न और शिरोमणि पुरस्कारों का ऐलान किया था। तीन दिसंबर को उच्च शिक्षा मंत्री राजिदर सिंह बाजवा की अध्यक्षता में चंढ़ीगढ़ में आयोजित बैठक में साहित्य और कला के लिए 18 अलग-अलग वर्गों के साहित्य रत्न और शिरोमणि पुरस्कारों का एलान किया गया था।

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Edited By: Vipin Kumar