Parkash Singh Badal: बादल साहब के जाने के बाद उनके लगाए पेड़ की छांव में रहेगा परिवार,क्या है इस पौधे की कहानी
Parkash Singh Badal भगवान सिंह कहते हैं कि प्रकाश सिंह बादल की ओर से कॉलेज रोड स्थित उनकी कोठी में लगाया गया यह पेड़ परिवार के लिए उनकी यादगार बन गया ...और पढ़ें

लुधियाना, भूपेंदर सिंह भाटिया। साल 2016 में बादल साहब अपना जन्मदिन मनाने के लिए कोठी में आए थे। परिवार के सदस्यों ने उनके आंगन में एक पौधा लगाने का आग्रह किया। सात साल में वह पौधा अब बड़ा हो गया है। भले ही बादल साहब अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके परिवार पर बादल साहब के आशीर्वाद के रूप में हमेशा इस पेड़ की छांव रहेगी। दैनिक जागरण से बातें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह के खास दोस्त भगवान सिंह ने साझा की।
भगवान सिंह कहते हैं कि प्रकाश सिंह बादल की ओर से कॉलेज रोड स्थित उनकी कोठी में लगाया गया यह पेड़ परिवार के लिए उनकी यादगार बन गया है। उन्होंने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से खास किस्म का पौधा उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था। यह पेड़ छायादार है और साल भर हराभरा रहता है। यह पेड़ हमारी यादों से जुड़ गया है और इसकी देखभाल कर बादल साहब को अपने इर्द-गिर्द पाएंगे।
परिवार के हर समारोह में पहुंचते थे बादल
भगवान सिंह बताते हैं कि बादल साहब परिवार के हर समारोह में पहुंचते थे। बेटे और बेटियों की शादी में बादल साहब पिता की तरह मौजूद रहते थे। वर्ष 1999 में उनके बेटे तरनजीत सिंह साधू की शादी थी। उन्होंने सामान्य तौर पर बादल साहब को सुबह दस बजे आने का न्योता दिया था। शादी से पिछली रात को देर रात तक पार्टी होने के कारण दूल्हा देर से उठा और तैयार होने में देरी हो गई।
इस बीच उन्हें सूचना मिली कि बादल साहब का काफिला समराला चौक से आगे निकल चुका है। उन्होंने सुरक्षा में तैनात एसपी से आग्रह किया कि थोड़ा धीरे चलें ताकि उनके आने से पहले दूल्हा तैयार हो जाए। एसपी ने ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने एक शिअद नेता को कुछ कार्यकर्ताओं को साथ लेकर बादल साहब से बैठक करने को कहा। उसके बाद दूल्हा तैयार होकर पहुंचा था।
अब कभी खत्म नहीं होगा कमरा नंबर 537 का इंतजार
कॉलेज रोड स्थित कोठी के कमरा नंबर 537 को बादल साहब का इंतजार कभी समाप्त नहीं होगा। कोठी में यह कमरा खास तौर पर बादल साहब के लिए तैयार करवाया गया था। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ होने के कारण बादल साहब यहां नहीं आ पा रहे थे। उनका सामान भी इस कमरे में वैसे ही पड़ा है। इसे बादल साहब की याद के तौर पर संजो कर रखेंगे।

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