लुधियाना, जेएनएन। कोरोना वायरस से हुई आर्थिक मंदहाली के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। अब सोशल मीडिया पर इसके लिए भ्रम फैलाए जा रहे हैं। यहां कुछ तत्‍वों ने प्रधानमंत्री योजना के तहत प्रत्येक व्यक्ति को 15 हजार रुपये देने की बात फैला रहे हैं। इसके लिए फर्जीवाड़ा किए जाने कर बात भी सामने आई है। फर्जी वेबसाइट के लिंक भेजकर लोगों से डाटा इकट्ठा किया जा रहा है और इसके माध्यम से पैसे भेजने की बात की जा रही है, जबकि सरकार ने ऐसा कोई भी एलान नहीं किया है। पुलिस ने इसकी शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की है।

फर्जी वेबसाइट के लिंक भेज मंगाया जा रहा डाटा, हो सकती है ठगी

यह मामला लुधियाना पुलिस कमिश्नर के ध्यान में भी आया है। उन्होंने साइबर सेल को जांच करने के आदेश दे दिए हैं। इसलिए आप भी सावधान रहें और यदि ऐसा कोई लिंक आए तो उस पर अपनी जानकारी न दें और न ही उसे शेयर करें।

ट्वीट कर महिला ने की पुलिस कमिश्‍नर से शिकायत, सीपी ने साइबर सेल को दिए जांच के आदेश

मीनाक्षी चौधरी नाम की महिला ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि अब कुछ लोगों की तरफ से लिंक भेजकर कहा जा रहा है कि यह सरकारी वेबसाइट है, सरकार 15 हजार रुपये देने जा रही है। उनके परिवार ने इसमें दिए फार्म को भर दिया। पुलिस को इस वेबसाइट की जांच करवानी चाहिए और इसके संचालक को तलाश करना चाहिए। उन्होंने ट्विटर हेंडल पर वेबसाइट का लिंक भी शेयर किया है। मीनाक्षी ने इसे लुधियाना पुलिस के ट्विटर पर भी टैग करके सीपी से इसकी जांच की मांग की है। वहीं सीपी ने रिप्लाई में कहा है कि यह सरासर गलत है और इसकी जांच करवाएंगे।

इस लिंक को भेजकर जुटाई जा रही जानकारी

प्रधानमंत्री के विज्ञापन के साथ मांगी जा रही जानकारी के साथ इन दिनों  ए‍क लिंक लोगों को भेजा जा रहा है। इसे खोलने पर इस पर नाम, पता और मोबाइल नंबर मांगा जा रहा है। यह जानकारी तभी सबमिट होगी, यदि इसे आगे वाट्सएप पर पांच लोगों को भेजा जाए। इस वेब पेज पर प्रधानमंत्री की फोटो लगा विज्ञापन भी दिया गया है। इसमें बड़े अक्षरों में 15000 रुपये के नीचे सब का साथ सब का विकास स्लोगन भी लिखा गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री योजना-2020 का जिक्र भी किया गया है।

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डाटा एकत्र करने के लिए भी हो सकता है प्रोपोगेंडा

अब इस तरह डाटा जुटाने पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। क्या इस साइट से ठगी का नया काम शुरू हो रहा है या फिर कोई राजनीतिक पार्टी इसके जरिए डाटा इकट्ठा कर रही है। साइबर मामलों जानकारों का मानना है कि हो सकता है कि कोई राजनीतिक पार्टी इसके जरिये चुनाव के लिए अभी से डाटा एकत्र कर रही हो। क्योंकि आने वाले चुनाव सोशल नेटवर्किंग साइट से ही लड़े जाएंगे।

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'सतर्क रहने की जरूरत'

''हो सकता है कि साइबर ठग नया हथकंडा बरत रहे हों। आप भी पैसा पाने के झांसे में आ सकते हैं। बाद में इसी तरह का ङ्क्षलक मैसेज के जरिए आपके मोबाइल पर आएगा और लिंक खोलने पर आगे की जानकारी मांगी जाएगी। जैसे अकाउंट नंबर, पेटीएम का लिंक वगैरा देंगे तो आपके खाते से पैसे भी निकल सकते हैं।

                                                                                                 - सचिन गुप्ता, एडीसीपी पीबीआइ।

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ऐसा कोई एलान नहीं,  मामले की जांच करवा रहे : पुलिस कमिश्नर

यह संगीन मामला है ऐसा कोई भी आदेश सरकार की ओर से नहीं दिया गया है। इसलिए यह फर्जी है। लोगों से धोखाधड़ी के लिए प्रधानमंत्री की फोटो वाले विज्ञापन और सरकारी वेबसाइट के नाम पर लोगों से ठगी की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैंने साइबर सेल को इस वेबसाइट की जांच करने के आदेश दे दिए हैं।

                                                                                      - राकेश अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर लुधियाना।

 

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