लुधियाना के फेमस चाचा जी से बादाम रोगन खरीदने दूर-दूर से आते हैं लोग, चौथी पीढ़ी कर रही कारोबार
कारोबारी सफर सांझा करते हुए राकेश कुमार ने कहा कि उनके दादा कर्म सिंह ने करीब 80 साल पहले बादाम रोगन बनाने का काम शुरू किया था। उसके बाद उनके पिता अमी चंद राजपाल इस कारोबार में आ गए और लोग उनको चाचा जी कहने लगे।

राजीव शर्मा, लुधियाना। आधुनिक युग में भी लोग अपनी परंपराओं एवं पारंपरिक उत्पादों के साथ ऐसे जुड़े हुए हैं कि उनका महत्व सदियों बाद भी कम नहीं हुआ है। आज भी लोग बादाम रोगन, नारियल का तेल, तिल, आंवले व जैतून के तेल का उपयोग कई कामों में कर रहे हैं। लोगों की नब्ज को टटोलते हुए देश के बंटवारे से पहले वर्ष 1940 में कर्म चंद ने घास मंडी के नजदीक कर्ता राम स्ट्रीट में बादाम रोगन बनाने का कारोबार शुरू किया।
प्यार से चाचा जी कह कर ही पुकारते हैं लोग
आज इस कारोबार को 80 साल से अधिक का वक्त हो गया है। अब उनकी चौथी पीढ़ी इस कारोबार में आ गई है। कारोबारी सफर सांझा करते हुए राकेश कुमार ने कहा कि उनके दादा कर्म सिंह ने करीब 80 साल पहले बादाम रोगन बनाने का काम शुरू किया था। उसके बाद उनके पिता अमी चंद राजपाल इस कारोबार में आ गए और लोग उनको चाचा जी कहने लगे। आज राकेश को भी लोग प्यार से चाचा जी कह कर ही पुकारते हैं। अब उनका बेटा प्रिंस राजपाल भी इसी कारोबार में आ गया है।
चाचा जी बादाम रोगन के अलावा करीब पंद्रह तरह के जिनमें शुद्ध खस खस रोगन, शुद्ध कद्दू मगज रोगन, तिल का तेल, अखरोट, कलौंजी, नारियल, आंवले, जैतून, अरंडी, अलसी, नीम, लौंग इत्यादि तेल तैयार किए जाते हैं। राकेश के अनुसार पुराने दौर में उनके बुजुर्ग बादाम का तेल मामजिस्ते में पीस कर देसी तरीके से ही निकालते थे। तब पूरे दिन में सिर्फ दो किलो बादाम गिरी से ही तेल निकलता था।
उस समय मेहतन भी काफी लगती थी। वर्ष 1975 में अमृतसर से एक मशीन ले आए। अभी तक वहीं काम कर रही है। इसमें एक दिन में 25 किलो तक बादाम गिरी को प्रोसेस करके तेल निकाला जा सकता है।
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