पटाखाें और पराली जलाने से लुधियाना की आबाेहवा खराब: प्रदूषण से हांफने लगे बच्चे; अभिभावकों की नींद उड़ी
Air pollution दिवाली पर पटाखे और खेताें में पराली जलाने के बाद लुधियाना में प्रदूषण बढ़ गया है। हालात यह है कि बच्चे इसके सबसे ज्यादा शिकार हाे रहे हैं। प्रदूषण की वजह से बच्चों के गले में इरीटेशन और सूजन आ रही है।
आशा मेहता, लुधियाना। Air pollution in Ludhiana दीपावली पर चले पटाखों और खेतों में जलाई जा रही पराली की वजह से शहर की हवा बेहद खराब हो चुकी है। गुलाबी ठंड के बीच पिछले चार दिनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स 250 से 300 के बीच चल रहा है। जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। प्रदूषण के बढ़ने से जहां बुजुर्गाें को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आ रही है, वहीं बच्चे भी प्रदूषण की जद में आकर बीमार हो रहे हैं। प्रदूषण की वजह से बच्चों के गले में इरीटेशन, सूजन आ रही है, वहीं नाक बंद हो रहा है।
कई बच्चों को तो अस्थमा जैसी गंभीर दिक्कत आ रही है। जिससे अभिभावकों की नींद उड़ गई है और वे शिशु रोग विशेषज्ञों के यहां दौड़ लगा रहे हैं। शहर के लगभग सभी अस्पतालों में शिशु रोग विशेषज्ञों के पास अचानक खांसी, जुकाम, गला खराब होने, नाक बंद होने व बुखार की शिकायत के साथ आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा प्रदूषण बढ़ने और तापमान में कमी आने से हो रहा है।
हर राेज बढ़ रही मरीजाें की तादाद
शहर के जाने माने शिशु राेग विशेषज्ञ डा. राजिंदर गुलाटी बताते हैं कि दीपावली से पहले तक उनके यहां अगर रोजाना इलाज के लिए 50 बच्चे आते थे, तो उनमें से खांसी, जुकाम वाले कम बच्चे होते थे। ज्यादातर को वायरल बुखार की शिकायत होती थी। लेकिन अब दीपावली के अगले दिन से 50 में से 40 बच्चे ऐसे आ रहे हैं, जिन्हें प्रदूषण की वजह से खांसी, जुकाम, छाती जाम होना या आवाज आना, नाक बहना, नाक बंद हेाना व अस्थमा जैसी शिकायत हो रही है। इनमें से ज्यादातर 2 साल से कम उम्र वाले हैं।
छोटे बच्चों को घर से बाहर कम लेकर जाएं अभिभावक
जिन बच्चों को चेस्ट में इंफेक्शन, गले में इंफेक्शन ज्यादा होती है, उन्हें एंटीबायोटिक देनी पड़ रही है। जबकि जिन्हें वायरल है, तो सिम्टोमेटिक ट्रीटमेंट या नॉन एलर्जिक दवाएं देकर ट्रीटमेंट कर रहे हैं। अभिभावकों को हम यही सलाह दे रहे हैं कि वह छोटे बच्चों को घर से बाहर कम लेकर जाएं। क्योंकि प्रदूषण बहुत ज्यादा है। बच्चे बहुत सेंसटिव होते हैं। जिसके चलते वह पर्यावरण में आने वाले बदलावों से जल्दी प्रभावित होते हैं। दूसरा अभिभावकों को कहते हैं कि वह बीमार बच्चों को डाइट का विशेष ध्यान रखें।
मास्क पहनाकर ही बाहर निकलें
अगर छह माह तक का बच्चा बीमार है, तो उसे मां उसे अपना दूध देते रहे। इससे अधिक उम्र वाले बच्चे को घर में बना हल्का भोजना देते हैं। लिक्वड डाइट के तौर पर ज्यादा से ज्यादा पानी दे सकते हैं। इससे बच्चे के अंदर बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। जबकि एलर्जी वाले बच्चों को मास्क पहनाकर ही बाहर लेकर जाएं। इसके अलावा अब मौसम बदल गया है। दिन व रात में ठंड हो रही है। दोपहर के वक्त हवा चल रही है, तो बच्चों को हल्के गर्म कपड़े पहनाकर जरूर रखें।
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