ओमान में भांजी को बेचकर भारत लौटी मामी, 1200 ओमानी रियाल में तय हुआ था सौदा; पीड़िता ने सुनाई दर्दनाक आपबीती
राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से ओमान में फंसी पंजाब की पांच युवतियों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया। इनमें से एक पीड़िता ने बताया ...और पढ़ें

ओमान में फंसी पंजाब की युवतियां सुरक्षित लौटीं, सांसद सीचेवाल के प्रयासों से संभव हुआ
जागरण संवाददाता, सुल्तानपुर लोधी(कपूरथला)। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयास से ओमान में फंसी पंजाब की पांच युवतियों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। इनमें से एक जिला जालंधर की रहने वाली पीड़िता सोमवार को सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया पहुंची और मीडिया के समक्ष अपनी दर्दनाक आपबीती साझा की।
पीड़िता ने बताया कि यदि संत सीचेवाल समय पर हस्तक्षेप न करते तो उनकी सुरक्षित वापसी संभव नहीं हो पाती। उल्लेखनीय है कि पीड़िता के परिजनों ने 16 दिसंबर 2025 को संत सीचेवाल से संपर्क किया था, जिसके बाद उन्होंने तुरंत विदेश मंत्रालय के समक्ष मामला उठाया। इसी प्रयास के चलते मात्र 14 दिनों के भीतर युवती को सुरक्षित भारत लाया जा सका।
पीड़िता ने बताया कि वह 30 दिसंबर को चार अन्य युवतियों के साथ भारत लौटी थी। जिनके मामले के बारे में संत सीचेवाल ने ओमान में फांसी 70 भारतीय युवतियों की सुरक्षित वापसी को लेकर विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा था। पीड़िता के अनुसार सितंबर माह में उसे रोजगार का झांसा देकर विदेश भेजा गया था, लेकिन ओमान पहुंचने पर उसे पता चला कि उसे 1200 ओमानी रियाल के बदले बेच दिया गया है।
उसने खुलासा किया कि इस पूरे जाल में उसे फंसाने वाली कोई और नहीं, बल्कि उसकी अपनी मामी थी, जो उसे ओमान छोड़कर भारत लौट आई। पीड़िता ने कहा कि धोखे के कारण ओमान में बिताए गए चार महीने उसके जीवन के सबसे भयावह दिन थे। वहां उससे जबरन गलत कार्य करवाने का दबाव डाला गया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया जाता था। जब उसने भारत लौटने की इच्छा जताई तो उससे दो लाख रुपये या भारत से दो अन्य युवतियां भेजने की शर्त रखी गई।
उसने बताया कि लगभग दो महीने तक वह घरेलू कार्य करती रही, लेकिन जब उसे लगा कि अब उसकी गरिमा सुरक्षित नहीं है तो वह किसी तरह वहां से निकलकर एक सुरक्षित स्थान तक पहुंची। वहां पहले से ही लगभग 70 अन्य भारतीय युवतियां इसी प्रकार की परिस्थितियों में फंसी हुई थीं। पीड़िता के अनुसार ओमान के मस्कट क्षेत्र में युवतियों को घरेलू काम के नाम पर बुलाकर उनका शारीरिक शोषण किया जा रहा है।
उन्हें बड़े सपने दिखाकर फंसाया जाता है, लेकिन हकीकत वहां पहुंचने के बाद बिल्कुल अलग होती है। विरोध करने पर भोजन बंद कर देना, शारीरिक उत्पीड़न और मारपीट धमकियां आम बात है। पीड़िता ने अन्य युवतियों और उनके परिवारों से अपील की कि वे विदेश भेजने के नाम पर किए जा रहे झूठे वादों से सावधान रहें, क्योंकि वर्तमान हालात में ओमान युवतियों के लिए सुरक्षित नहीं है।
ओमान में फंसी 70 युवतियों को लेकर विदेश मंत्रालय को लिखा था पत्र
इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि अरब देशों में भारतीय युवतियों का शोषण एक गंभीर और चिंताजनक विषय है। हाल ही में उन्होंने ओमान में फंसी लगभग 70 युवतियों के संबंध में विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा था, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच युवतियों को सुरक्षित भारत वापस भेजा गया।
उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव तस्करी से जुड़े गिरोहों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जिससे भविष्य में कोई और बेटी इस तरह के जाल का शिकार न बने।

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