पंजाब में Vulture Restaurant से गिद्धों का संरक्षण, पठानकोट में सिर्फ 20 रह गई है इन पक्षियों की संख्या
पठानकोट के चंडोला जंगल में वल्चर रेस्टोरेंट (Vulture Restaurant) शुरू करने की तैयारी है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 7.35 लाख रुपये खर्च होंगे। इससे पंजाब भर में खत्म हो रहे गिद्धों के लिए रेस्टोरेंट तैयार करके उसकी चारों ओर से बाड़बंदी की जाएगी।

पठानकोट [राज चौधरी]। देश भर में लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों की प्रजातियों को सरंक्षित करने के लिए पठानकोट में एक बार फिर प्रयास शुरू किए गए हैं। यहां वल्चर रेस्टोरेंट शुरू करने की तैयारी है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 7.35 लाख रुपये खर्च होंगे। इससे पंजाब भर में खत्म हो रहे गिद्धों के लिए रेस्टोरेंट तैयार करके उसकी चारों ओर से बाड़बंदी की जाएगी ताकि गिद्धों को दिए जाने वाले भोजन को कुत्ते न ले जा सकें।
पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश के बिलकुल बार्डर पर स्थित इस स्पाट पर किसी समय गिद्धों की संख्या 600 के करीब हो चुकी थी। फिर, साल 2010 में फंड के आभाव में इस स्थान तक भोजन नहीं पहुंचाया गया। इसकी देखरेख नहीं हो सकी जिसके बाद अब इस एरिया में कुछेक गिद्द देखने को मिलते हैं। पहले यहां गिद्धों की बड़ी संख्या थी लेकिन अधिकतर पशु पालकों ने पशुओं से अधिक दूध पाने के लिए डेक्लोफिनेक दवाइयों का प्रयोग शुरू कर दिया गया। ऐसे में जब इन इंजेक्शन का लगातार प्रयोग किये जाने वाले जानवरों की मृत्यु होती तो उन्हें हड्डा रोड़ी या किसी दूर-दराज के स्थानों पर फेंक दिया जाता। इन जानवरों का मांस खाने गिद्धों की ब्रीडिंग क्षमता कम हो गई। इसी कारण, पंजाब व क्षेत्र भर में लगभग विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई।
7.35 लाख रुपये से बनाया जाएगा रेस्टोरेंट: डीएफओ
डीएफओ राजेश महाजन ने कहा कि जिलाधीश संयम अग्रवाल ने इस प्रोजेक्ट में खास तौर पर दिलचस्पी दिखाई है जिसके बाद एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करते हुए इस रेस्टोरेंट की रिपेयर करवाई जाएगी। इसके चारों ओर बाउंड्री करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास रहेगा कि एक बार पुन: विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी गिद्धों की संख्या को बढ़ाया जा सके।
जिला पठानकोट में हिमालयन ग्रोफेन, यूरेशियन तथा वाइट रेडरेमफैड वल्चर की प्रजातियों की पुष्टि हो चुकी है। अब इन प्रजातियों के गिद्धों की संख्या जिला भर में करीब 20 के करीब बताई जा रही है। इस रेस्टोरेंट के पूरी तरह से तैयार होने के बाद उन्हें प्रतिदिन भेजे जाने वाले मांस इत्यादि को पहले डाक्टर जांचेंगे फिर टीम द्वारा इनके भोजन को चंडोला तक पहुंचाया जाएगा।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।