नितिन धीमान, अमृतसर। भारत विभाजन के बाद अस्तित्व में आए पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये की खैरात दी गई थी। तब जाकर पाकिस्तान के सिर पर तिरपाल आई थी। हास्यास्पद है कि 75 वर्ष बाद भी पाकिस्तान आत्मनिर्भर नहीं हो सका। कभी चीन को गधे बेचकर आर्थिक साधन जुटाने की कोशिश करता है, तो कभी अपने ही मुल्क में सब्जियां, फल आदि महंगे कर अवाम का कचूमर निकाल रहा है। अब तो हद हो गई। पाकिस्तान पिछले तीन सालों से भारत के रेल कोच का इस्तेमाल कर रहा है।

दरअसल, वर्ष 2019 में समझौता एक्सप्रेस को बंद कर दिया गया था। यह गाड़ी 7 अगस्त 2019 को अमृतसर के अटारी स्टेशन से रवाना हुई थी, लेकिन भारत द्वारा कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने इसे बंद कर दिया। पाकिस्तान के तत्कालीन रेल मंत्री शेख रशीद अहमद ने समझौता एक्सप्रेस का समझौता तोड़ डाला और इस सेवा को हमेशा के लिए बंद करने का निर्णय लिया। पाकिस्तान ने भारत से सभी राजनयिक और व्यापारिक संंबंध विच्छेद कर दिए थे।

मालगाड़ी के दस डिब्बे भी नहीं लौटाए

उस दिन पाकिस्तान रवाना हुई समझौता एक्सप्रेस की बोगियां आज तक लौट नहीं पाईं। समझौता एक्सप्रेस की 11 बोगियों के साथ सामान से भरे मालगाड़ी के दस डिब्बे भी पाकिस्तान स्थित वाघा स्टेशन पर खड़े करवा दिए गए। भारतीय रेल मंत्रालय ने तीन वर्षों में तीन बार पाकिस्तान को स्मरण पत्र भेजकर कोच लौटाने को कहा है। हास्यास्पद है कि पाकिस्तान ने जवाब तो दिया नहीं, पर इन कोच का इस्तेमाल अपनी सवारियां ढोने में कर रहा है।

अटारी-लाहौर समझौता एक्सप्रेस की एक और पुरानी तस्वीर।

आपको बता दें कि 22 जुलाई 1976 के दौरान शिमला समझौता हुआ था। इसके तहत अमृतसर से समझौता एक्सप्रेस शुरू करने का प्रस्ताव था। 1994 में समझौता एक्सप्रेस को अटारी स्टेशन से लाहौर के मध्य दौड़ाया जाने लगा। मकसद था दोनों मुल्कों में बसे बाशिंदों का अपनों से मिलने का मार्ग सुगम हो सके। हालांकि ऐसा अनेकानेक बाद हुआ जब पाकिस्तान ने इस ट्रेन की सेवाओं पर रोक लगाई।

जनवरी 2020 मे भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार को ट्रेन के कोच लौटाने को पत्र लिखा था, पर मुफलिसी के दौर से गुजर रहा पाकिस्तान इन कोच का इस्तेमाल अपने यात्रियों को इधर से उधर पहुंचाने में कर रहा है। यह पाकिस्तान की बदनीयती को स्पष्ट उजागर करता है।

वास्तविक स्थिति यह है कि विभाजन के बाद भारत के अधिकांश लोग विशेषत: मुस्लिम परिवार पाकिस्तान चले गए थे। दोनों देशों के लोगों को आपस में मिलाने का सशक्त माध्यम थी समझौता एक्सप्रेस। यह लौहपथगामिनी सरहद की मोहताज नहीं थी, पर पाकिस्तान की इस हरकत ने दोनों देशों में बसे लोगों की भावनाओं को उद्वेलित किया है।

Edited By: Pankaj Dwivedi