जालंधर, जेएनएन। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर यानि पीके के नाम पर फर्जी कंपनी बनाकर जालंधर के तीन पूर्व मंत्रियों से ठगी करने की कोशिश की गई। कांग्रेस के ये तीनों बड़े नेता इस फर्जी टीम के जाल में भी फंस गए लेकिन समय रहते उनका बचाव हो गया। इस फर्जी टीम का प्रशांत किशोर की आईपैक से कोई लेना-देना नहीं है।

तीन नाम तो ऐसे हैं जो बच गए लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि कई नेता इस चंगुल में फंसे हों लेकिन कोई भी कुछ बोलने के लिए सामने नहीं आएगा। इन नेताओं में से दो से 25-25 लाख रुपये की मांग की गई थी और टिकट के लिए सर्वे में आगे दिखाने और टिकट के लिए जुगाड़ तक करने का वादा किया गया था। एक पूर्व मंत्री ने तो हलके में अपनी गतिविधियां भी बढ़ा दी थी ताकि टिकट मिलने के बाद जीत आसान हो सकें।

कई अखबारों व इंटरनेट मीडिया के जरिए अपनी हवा बनाने की कोशिश भी की थी। पैसे देने के लिए जगह भी तय कर ली थी लेकिन आखिर में 'टीम पीके' पर शक होने के बाद हाथ पीछे खींच लिए। जिन तीन पूर्व मंत्रियों को फंसाने की कोशिश की गई थी उनमें से एक ने 'टीम पीके' को घास नहीं डाली क्योंकि वह चुनाव से दूरी बना चुके हैं।

इन तीनों में दो पूर्व मंत्री दलित समुदाय से हैं। एक के लगातार चुनाव हारने के बाद उन्हेंं उनके इलाके से बाहर भेज दिया गया था जबकि दूसरे को भी बार-बार हार मिलने के कारण टिकट नहीं दी गई। यह पूर्व मंत्री कांग्रेस के एक सीनियर दिवंगत नेता का करीबी रिश्तेदार है। तीसरा पूर्व मंत्री खुद ही चुनावी राजनीति से बाहर है और जालंधर देहात इलाके से संबंधित है। एक दिन पहले सुनाम से टिकट की दावेदार दमन बाजवा ने भी फर्जी टीम पीके के खिलाफ शिकायत दी है। दमन बाजवा से टिकट दिलवाने के लिए 7 लाख रुपये की मांग की गई थी।

फर्जी टीम का प्रशांत किशोर से कोई लेना-देना नहीं

पंजाब में कांग्रेस की चुनाव रणनीति तैयार करने के लिए काम कर रही टीम पीके के नाम पर नेताओं को फांसने में फर्जी टीम एक्टिव हो गई। यह टीम करीब 2 महीने से नेताओं से संपर्क साध रही है। प्रशांत किशोर की कंपनी आईपैक की टीम चुनावी रणनीति तैयार करने से पहले फील्ड में जाकर लोगों का मन टटोल रही है। इसी का फायदा यह फर्जी टीम उठा रही है। इस समय हाशिए पर चल रहे नेताओं और नए उभर रहे नेताओं को फंसाने की कोशिश की जा रही है। चूंकि मामला टिकट से जुड़ा है ऐसे में कोई भी नेता इस राज को किसी से शेयर ही नहीं करता। हालांकि जिन तीन नेताओं को फांसने की कोशिश की थी वह बाल-बाल बच गए हैं लेकिन यह भी संभव है कि कुछ नेता नुकसान उठा चुके हों।

सीएम कार्यालय तक पहुंचा था मामला

पूर्व मंत्री और पार्टी में बड़े पदों पर रहे नेता के 'टीम पीके'  के जाल में फंसकर निकलने का मामला सीएम कार्यालय भी पहुंच चुका है। करीब 15 दिन पहले इसकी खूब चर्चा रही। हालांकि तब यही तय किया गया कि इस मामले में केस दर्ज न करवाया जाए। केस दर्ज करवाने की सूरत में पार्टी की भी बदनामी का खतरा था क्योंकि 'टीम पीके' कांग्रेस की टिकट बेचने की कोशिश कर रही थी।

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