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Punjab News: घूमने गए थे धोखे से हो गए रूसी सेना में भर्ती.. अब PM मोदी ने पुतिन से की बात, घर वापसी की जगी उम्मीद

टूरिस्ट वीजा पर रूस घूमने गए पंजाब के कुछ युवा धोखे से रूस की सेना में भर्ती हो गए। जिसके बाद आज रूस की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्लादिमीर पुतिन के साथ इस विषय पर बातचीत की। जिसके बाद उनके घर वापसी का रास्ता साफ हो गया। युवाओं का इंतजार कर रहे परिजनों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।

By Jagran News Edited By: Prince Sharma Tue, 09 Jul 2024 07:02 PM (IST)
Punjab News: घूमने गए थे धोखे से हो गए रूसी सेना में भर्ती.. अब PM मोदी ने पुतिन से की बात, घर वापसी की जगी उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी के पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस में फंसे भारतीय युवकों की वापसी की बंधी आस

जागरण संवाददाता, गुरदासपुर। रूस की सेना में फंसे भारतीय युवकों की वापसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रूस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की है, जिसके बाद उनकी घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है।

इसके चलते रूस में फंसे भारतीय युवकों के परिवारों को अपने बच्चों की जल्द वापसी की उम्मीद बंधी है। ज्ञात रहे कि रूस में चल रहे युद्ध में चार भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि दस वापस लौट आए थे। अभी भी करीब 35 युवक वहीं फंसे हुए हैं।

24 दिसंबर को टूरिस्ट वीजा पर गए थे

गुरदासपुर के गांव डेयरीवाल का गगनदीप सिंह भी रूस की सेना में फंसा हुआ है, लेकिन उसके घर लौटने का रास्ता साफ होने के बाद उसके स्वजनों में खुशी की लहर है।

उसके पिता बलविंदर सिंह ने केंद्र सरकार का धन्यवाद करते बताया कि गगनदीप सिंह 24 दिसंबर को टूरिस्ट वीजा पर रूस गया था।

वहां उसके होटल में कुछ और भारतीय युवक भी थे। वहां से उन्होंने घूमने के लिए टेक्सी की थी। इसके बाद टेक्सी वाला उन्हें घुमाने ले गया।

पैसे देने की बात आई तो टेक्सी चालक ज्यादा पैसे मांगने लगा, लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं थे। इसके चलते उन्हें वहीं रास्ते में उतारकर टेक्सी वाला चला गया। इस दौरान उन्हें रूस की पुलिस ने पकड़ लिया और बाद में सेना के हवाले कर दिया।

रूसी भाषा में लिखे कुछ कागजों पर करा लिए साइन

सेना के अधिकारियों ने उन्हें कहा कि या तो उन्हें दस साल की कैद काटनी पड़ेगी या वे एक साल सेना में काम करें। इसके बाद उनसे रूसी भाषा में लिखे कुछ कागजों पर साइन करा लिए गए।

करीब दस दिन की ट्रेनिंग के बाद उन्हें यूक्रेन के साथ युद्ध में भेज दिया गया। उन्हें लगातार एक हफ्ते तक फ्रंट लाइन पर रखा गया।

इस बीच कुछ युवक बीमार हो गए और उन्होंने अपनी व्यथा रूसी सेना के एक अधिकारी को बताई। उक्त अधिकारी ने उन्हें फ्रंट लाइन से वापस भिजवा दिया।

अब उनके बेटे सहित बाकी के युवा सैनिकों के मोर्चों आदि की सफाई का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी प्रधानमंत्री के साथ इस मामले को लेकर बातचीत की है, जिसके बाद उनके बच्चों के जल्द घर लौटने की आस बंधी है।

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