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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अरे बाप रे! पंजाब में फर्जी गांव बसाकर मनरेगा में किया 43 लाख का घोटाला, अधिकारियों के उड़े होश

Published: Fri, 24 Jan 2025 09:59 AM (IST)

पंजाब के फिरोजपुर में एक फर्जी गांव बनाकर मनरेगा में 43 लाख के घोटाला किया गया है। फाइलों में फर्जी ...और पढ़ें

पंजाब में फर्जी गांव बसाकर मनरेगा में किया घोटाला।
पंजाब में फर्जी गांव बसाकर मनरेगा में किया घोटाला।

HighLights

  1. पंजाब में बसाया गया फर्जी गांव
  2. 140 लोगों के बनाए जॉब कार्ड
  3. मनरेगा से किया 43 लाख का घोटाला

तरुण जैन, फिरोजपुर। पंजाब के फिरोजपुर में फर्जी गांव बसाकर मनरेगा में 43 लाख रुपये घोटाले का मामला सामने आया है। फाइलों में फर्जी गांव बसाकर मनरेगा योजना में 43 लाख रुपये के घोटाला करके एडीसी (विकास) कार्यालय के कर्मचारी छह महीने तक इसे दबाकर बैठे रहे। यह मामला साल 2018-19 का है।

140 मजदूरों का बनाया गया था जॉब कार्ड

इसके तहत न्यू गट्टी राजोके नाम से फर्जी गांव दिखाकर पहले 140 मजदूरों को मनरेगा जॉब कार्ड बनाए गए और फिर उनके विभिन्न कार्य करवाने के नाम पर 43 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

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घोटाले का राजफाश होने के बाद एडीसी विकास लखबिंदर सिंह ने राजस्व विभाग से रिपोर्ट मांगी है। पूछा है कि क्या नवीं गट्टी राजोके व न्यू गट्टी राजोके दो अलग-अलग गांव हैं। एक सप्ताह बाद भी राजस्व विभाग ने एडीसी को रिकॉर्ड नहीं सौंपा है।

गंभीरता से हो रही है मामले की जांच

एडीसी (वि.) लखबिंदर सिंह रंधावा ने बताया कि वे मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग का रिकॉर्ड न मिलने के कारण गांव की स्थिति के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। आरटीआई में घोटाले का पर्दाफाश 15 जुलाई, 2024 को ही हो गया था, लेकिन करीब छह महीने से अधिकारी इसे छुपाते रहे।

कुछ महीने पहले एडीसी (वि.) का पद संभालने वाले लखबिंदर सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की है। फर्जी गांव आरटीआई एक्टिविस्ट गुरदेव सिंह के सवालों के जवाब में सामने आया था।

फर्जी गांव में 55 प्रोजक्ट पर दिखाया गया काम

बता दें कि राजस्व रिकॉर्ड में फिरोजपुर ब्लाक में गट्टी राजोके व नवीं गट्टी राजोके दो गांव हैं। अधिकारियों व कर्मचारियों ने न्यू गट्टी राजोके के नाम से फर्जी गांव बनाकर उसकी डोंगल भी बना ली। तत्कालीन ब्लॉक समिति सदस्य गुरदेव सिंह ने इसकी अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

एक अधिकारी ने तो यह तक कह दिया क्या वे कई कर्मचारियों को फांसी पर लटका दें। अधिकारियों ने नवीं गट्टी राजोके में मनरेगा योजना में 35 प्रोजेक्ट पर काम कराया, जबकि फर्जी गांव न्यू गट्टी राजोके में मजदूरों से 55 प्रोजेक्ट पर काम दिखाया गया।

विकास कार्य दिखाकर 43 लाख का किया गया घोटाला

140 मजदूरों के मनरेगा जॉब कार्ड बनाकर उनसे किसान शेल्टर, धुस्सी बांध निर्माण, बीएसएफ की सतपाल चौकी पर बांध की मेंटीनेंस, आर्मी बुर्जी के पास बांध का निर्माण, आर्मी पुल, प्राइमरी स्कूल की चारदीवारी बनाने, पौधारोपण आदि के काम रिकॉर्ड में दर्ज कर 43 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।

भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में कार्यालय

बता दें कि इसी कार्यालय में 1.80 करोड़ की राशि बिना निर्माण के टाइल्स फैक्ट्री को जारी करने का घोटाला भी सामने आ चुका है। हाल में एडीसी विकास के ही कार्यालय में काम करने वाले मनरेगा कर्मचारी की हत्या का मामला भी संदिग्ध बताया जा रहा है। मौत के बाद उसके बैंक खाते से कई लाख रुपये निकाले गए।

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