सरहिंद नगर कौंसिल की बैठक में 37 विकास कार्यों समेत 9 प्रस्ताव पास, त्योहारी सीजन की समस्याओं की हुई अनदेखी
सरहिंद नगर कौंसिल की बैठक में पौने चार करोड़ से अधिक के विकास कार्यों सहित नौ प्रस्ताव पास हुए। बैठक ...और पढ़ें

सरहिंदर नगर काउंसिल की बैठक में मौजूद पार्षद।
HighLights
37 विकास कार्य और 9 प्रस्तावों को मिली सर्वसम्मति से मंजूरी।
कचरा निस्तारण का ठेका निजी कंपनी को देने का निर्णय।
विपक्ष ने मूलभूत समस्याओं की अनदेखी पर उठाए गंभीर सवाल।
नवनीत छिब्बर, फतेहगढ़ साहिब। सरहिंद-फतेहगढ़ साहिब नगर कौंसिल के जरनल हाउस की बैठक शुक्रवार को कौंसिल प्रधान आशा रानी की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें ईओ अवतार चंद, विधायक लखबीर सिंह राय और सभी पार्षद उपस्थित रहे। बैठक में पौने चार करोड़ से ज्यादा के 37 विभिन्न विकास कार्यों को मंजूरी दी गई।
इसके साथ ही नये 66 केवी ग्रिड के लिये जमीन, प्राइवेट कंपनी से ठेके पर गारबेज लिफ्टिंग करवाने और ट्रक बाडी बिल्डरों के पुर्नवास के लिये जमीन आवंटित करने सहित सभी 9 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
सरहिंद नगर कौंसिल हाउस की यह पहली ऐसी बैठक रही जिसमें बहुमत वाली आम आदमी पार्टी के पार्षद खुले तौर पर बंटे हुए नजर नहीं आए और विधायक को मान मनौव्वल नहीं करनी पड़ी। हालांकि कुछ पार्षद एक-दो मुद्दों को ले प्रधान से सहमत नहीं थे, लेकिन पहले की बैठकों की तरह इस बार खुले तौर पर कोई नाटकीय घटनाक्रम देखने को नहीं मिला।
नगर कौंसिल में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के पास 17 पार्षदों का मजबूत बहुमत है, जबकि कांग्रेस के 5 पार्षद विपक्ष में हैं। भारी बहुमत के बावजूद बैठक में शहर की बुनियादी और ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर बहस देखने को नहीं मिली, बल्कि महज औपचारिक कार्रवाई निभाते हुए एजेंडे में शामिल सभी 9 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
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9 प्रस्ताव पास किए गए
हाउस की मीटिंग में जो 9 प्रस्ताव पास किये गये उनमें एक प्रस्ताव गारबेज लिफ्टिंग और सेग्रीगेशन का काम प्राइवेट कंपनी को ठेके पर देना का भी है। जिसमें कहा गया है कि नगर कौंसिल के पास मालिकाना हक की कोई ऐसी जगह नहीं है जहां गारबेज डंपिंग ग्राउंड बनाया जा सके। जबकि मौजूदा हाउस की जुलाई में हुई पहली जनरल मीटिंग में डंपिंग ग्राउंड और सेग्रिगेशन प्लांट का प्रस्ताव पेश कर पास किया गया था।
लेकिन उस पर आगे की बैठकों में कभी चर्चा तक नहीं हुई। ऐसे में नगर कौंसिल हाउस पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वभाविक है। विधायक का अनौपचारिक रूप से कहना था कि दोनों ही मामलों में खर्च बराबर है, इसलिये यह फैसला लिया गया ताकि गारबेज डंपिंग और सेग्रीगेशन का झंझट ही खत्म हो जाए और शहर कचरा फ्री रहे। विधायक के पक्ष को मान भी लिया जाए तो इस पर पहले क्यों विचार नहीं किया गया।
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तीन प्रमुख प्रस्तावों को हाउस ने मंजूरी दी
- वर्कशाप्स का पुनर्वास: चावला चौक के समीप नेशनल हाइवे से लगती जमीन को करीब 30 ट्रक-बस बॉडी बिल्डिंग वर्कशाप्स को आवंटित करने का निर्णय लिया गया। इन वर्कशाप्स को मंडी बोर्ड की अधिगृहित जमीन से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हटाया गया था।
- कचरा निस्तारण का ठेका: डंपिंग ग्राउंड के लिए अपनी जगह न होने के चलते सूखे कचरे की लिफ्टिंग और प्रोसेसिंग का काम किसी निजी कंपनी को ठेके पर देने का प्रस्ताव पास किया गया।
- 66 केवी ग्रिड के लिए जमीन: शहर में बिजली सप्लाई व्यवस्था दुरुस्त करने के उद्देश्य से दशहरा ग्राउंड के पास 12 कनाल 18 मरले जगह 66 केवी पावर ग्रिड लगाने के लिए मंजूर की गई।
प्रस्तावों पर विपक्ष ने उठाए सवाल
एजेंडे के बाहर और भीतर शामिल कई मुद्दों को लेकर कांग्रेस और सत्ता पक्ष आमने-सामने नजर आए। पंजाब सरकार की उस नीति को एजेंडे में शामिल न करने पर तीखा विवाद हुआ, जिसके तहत सरकारी कमर्शियल प्रॉपर्टी पर 15 साल से काबिज किरायेदारों को मालिकाना हक दिया जाना है।
कांग्रेस पार्षद सुनीता रानी और पूर्व सीनियर वाइस प्रधान नरिंदर कुमार प्रिंस ने इस पर सवाल उठाए, जबकि आप पार्षद एडवोकेट राजेश उप्पल और विधायक ने स्पष्ट किया कि 27 अक्टूबर को मिले नोटिफिकेशन के बाद प्रक्रिया जारी है।
मेरी दुकान मेरे नाम योजना के तहत 6 नवंबर तक आवेदन किये जा सकते हैं। एसडीएम कमेटी की क्लीयरेंस के बाद ही इसे हाउस में लाया जाएगा। इसके अलावा, कौंसिल दफ्तर में 30-35 लोगों के बैठने वाले नए मीटिंग हाल के लिए 64 लाख रुपये के भारी-भरकम बजट पर विपक्ष ने सवाल उठाए, जिस पर प्रधान आशा रानी ने इसके पेपरलेस, टैब, माइक और डिस्प्ले युक्त हाईटेक हाल होने की दलील दी।
श्मशान घाट के पास बन रहे पार्क प्रोजेक्ट को रोककर वहां 66 केवी ग्रिड बनाने और 1.55 लाख रुपये से 3 नए लैपटॉप खरीदने के प्रस्ताव पर भी कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया और पहले से मौजूद लैपटॉप्स के गायब होने डेटा के मिसयूज का आरोप लगाया।
मूलभूत समस्याओं की अनदेखी
त्योहारों के इस व्यस्त दौर में हुई हाउस की बैठक से यह गंभीर सवाल खड़ा होता हैं-
- क्या नगर कौंसिल अपनी सीधी प्राथमिकताओं और जिम्मेदारियों से भटक रही है?
- संकरे बाजारों वाले इस छोटे शहर में त्योहारी सीजन के दौरान अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम की स्थिति से निपटने के लिए किसी ठोस रणनीति या वेंडिंग ज़ोन पर विचार क्यों नहीं किया गया?
- इसके अतिरिक्त, त्योहारों के दौरान पैदा होने वाले अतिरिक्त कचरे के उठान, रिहायशी इलाकों व बाजारों में घूम रहे आवारा पशुओं की समस्या, और देर रात तक खरीदारी करने निकलने वाले नागरिकों के लिए बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों व जर्जर सड़कों की त्वरित मरम्मत पर कोई ठोस फैसला क्यों नहीं लिया गया?
नगर कौंसिल प्रधान ने इन सभी मुद्दों पर नागरिकों से सहयोग की अपील कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। स्पष्ट बहुमत का अर्थ शहर के अहम मुद्दों पर चर्चा से किनारा करना नहीं हो सकता, और जब तक नगर कौंसिल जमीनी जरूरतों को प्राथमिकता नहीं देगी, महंगे प्रस्ताव जनता को राहत नहीं दे पाएंगे।
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