पंजाब में पराली जलाने के मामलों में भारी उछाल, कुल आंकड़े एक हजार के पार पहुंचे; अमृतसर-तरनतारन सबसे आगे
पंजाब में पराली जलाने के मामलों की संख्या बढ़कर 1,007 हो गई है। अकेले तीन जिलों तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
पंजाब में पराली जलाने के मामले एक हजार के पार।
तरनतारन, अमृतसर में सर्वाधिक पराली जलाने की घटनाएं।
17 लाख से अधिक जुर्माना, 246 एफआईआर दर्ज।
डिजिटल डेेस्क, चंडीगढ़। पंजाब में पिछले एक सप्ताह में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, जिसमें एक ही दिन में 194 मामलों की वृद्धि हुई है, जिससे संचयी कुल आंकड़ा 1,007 हो गया है। इन घटनाओं में से 672 मामले तीन जिलों तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर से रिपोर्ट किए गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल 15 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच पंजाब में पराली जलाने के 542 मामले दर्ज किए गए थे।
आंकड़ों से पता चला कि 28 अक्टूबर तक कुल मामलों की संख्या 813 थी, और 29 अक्टूबर को 194 की हालिया तेजी के साथ, कुल आंकड़ा अब 1,007 पर पहुंच गया है।
1,007 पराली जलाने की घटनाओं में से, तरनतारन में सबसे बड़ा हिस्सा यानी 397 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले सामने आए। आंकड़ों से पता चला कि तरनतारन और अमृतसर में कुल धान के खेती वाले क्षेत्र का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पहले ही काटा जा चुका है।
यह भी पढ़ें- धमाकों से दहला लुधियाना, फील्ड गंज के पटाखों के गोदाम में लगी भयंकर आग; एक व्यक्ति की मौत
17 लाख से अधिक लगाया गया जुर्माना
अब तक पराली जलाने के 349 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा के रूप में 17 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 13 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूल की जा चुकी है। इसके अलावा, पराली जलाने की घटनाओं से संबंधित 246 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें तरनतारन में 165 और अमृतसर में 24 मामले शामिल हैं। ये मामले भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा) के तहत दर्ज किए गए हैं।
हर साल पराली जलाने की निगरानी 15 सितंबर से शुरू होती है, जो 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली धान की खरीद से दो सप्ताह पहले है। पिछले हफ्ते, एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय टीम ने अमृतसर और तरनतारन जिलों के उपायुक्तों और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की थी।
यह भी पढ़ें- ISI को सेना की खुफिया जानकारी देता था सेना का जवान, पंजाब पुलिस ने किया गिरफ्तार
पराली प्रबंधन और प्रशासनिक निर्देश
आयोग ने थर्मल पावर प्लांटों, ईंट भट्टों और उद्योगों में जहां ऐसा ईंधन उपयोग संभव है, वहां धान की पराली के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। आयोग ने मैदानी स्तर पर समय पर हस्तक्षेप के महत्व को भी उजागर किया, अधिकारियों को नियमित रूप से गांवों का दौरा करने और न केवल पराली प्रबंधन सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में संवाद करने बल्कि यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आवश्यक मशीनरी और संसाधन किसानों तक तुरंत पहुंचें।
चूंकि तरनतारन में धान की पराली जलाने की सबसे अधिक संख्या दर्ज की जा रही है, इसलिए उपायुक्त को इस मुद्दे को प्राथमिकता देने और ऐसी घटनाओं की रोकथाम और प्रबंधन के लिए मैदानी स्तर के उपायों को तेज करने का निर्देश दिया गया।
(इनपुट- पीटीआई)
यह भी पढ़ें- 'कल 12 बजे आप पहली उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करेगी', CM मान ने दिल्ली में पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर की घोषणा
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।