पंजाब विधानसभा 2027 चुनाव: संजीव अरोड़ा को AAP का टिकट, जानिए उन चर्चित चेहरों को जिन्होंने जेल से जीत की दर्ज
आम आदमी पार्टी द्वारा जेल में बंद मंत्री को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद, पंजाब से लेकर बिहार तक जेल से चुनाव जीतने वाले नेताओं का इतिहास चर्चा में है।

आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार संजीव अरोड़ा, पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, अमृतपाल सिंह और सिमरजीत सिंह मान।
HighLights
AAP ने जेल में बंद संजीव अरोड़ा को टिकट दिया।
सिमरनजीत मान, जॉर्ज फर्नांडिस जेल से चुनाव जीते।
अमृतपाल सिंह और इंजीनियर राशिद ने भी जीत दर्ज की।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) के 40 उम्मीदवारों की पहली सूची ने राजनीतिक इतिहास एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पार्टी ने जेल में बंद कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को लुधियाना पश्चिम से प्रत्याशी बनाया है। अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय ने मई 2026 में कथित मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद हैं।
पार्टी ने उनकी उम्मीदवारी घोषित कर यह साफ कर दिया है कि जेल में रहने के बावजूद वह चुनावी मैदान में बने रहेंगे। इससे पहले भी देश में कई नेताओं ने जेल से ही चुनावी मुकाबला किया है। कुछ नेताओं ने तो इतनी बड़ी जीत दर्ज की कि उनके चुनावी परिणाम आज भी मिसाल के तौर पर याद किए जाते हैं।
यह भी पढ़ें- पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: लुधियाना में AAP ने 7 विधायकों पर जाताया भरोसा, जेल में बंद संजीव अरोड़ा को भी टिकट
1989 में सिमरनजीत मान ने जीता था चुनाव
जेल से चुनाव लड़कर जीतने का सबसे चर्चित उदाहरण शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान का है। वर्ष 1984 में आपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में अपनी आइपीएस की नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल में रहते हुए उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) का गठन किया और 1989 के लोकसभा चुनाव में तरनतारन सीट से चुनाव लड़ा।
चुनाव परिणाम आया तो मान को 5,27,207 वोट मिले। यह कुल पड़े मतों का करीब 94 प्रतिशत था। उनकी जीत का अंतर लगभग साढ़े चार लाख वोट रहा। खास बात यह थी कि वह जेल में बंद थे और खुद मतदाताओं के बीच जाकर प्रचार नहीं कर पाए थे। उनकी इस जीत का रिकॉर्ड आज तक नहीं टूट पाया है।
दिल्ली धमाकों के अतिंदरपाल ने जीता था चुनाव
1989 के लोकसभा चुनाव में ही पंजाब में जेल से चुनाव लड़कर जीतने का एक और उदाहरण सामने आया था। अतिंदरपाल सिंह ने पटियाला लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। वह दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद जेल में थे। सिमरनजीत सिंह मान ने अपने उम्मीदवार को उनके समर्थन में बैठा दिया था।
अतिंदरपाल सिंह को 2,94,172 वोट मिले, जो कुल पड़े मतों का 46.59 प्रतिशत था। इस तरह उन्होंने भी जेल में रहते हुए लोकसभा चुनाव जीत लिया था।
डिफेंस मिनिस्टर रहे फर्नांडिस ने जेल से लड़ा चुनाव
देश में जेल से चुनाव लड़ने का एक बड़ा उदाहरण वर्ष 1977 का है। आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस ने बिहार की मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वह उस समय तिहाड़ जेल में बंद थे और उनके हाथों में हथकड़ी तथा पीछे जेल की सलाखों वाली तस्वीर चुनाव प्रचार का प्रमुख माध्यम बनी थी।
मतदाताओं ने उनके पक्ष में जबरदस्त समर्थन दिया और उन्होंने करीब 3.34 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की। उनकी जीत को आपातकाल के खिलाफ जनाक्रोश से जोड़कर भी देखा गया। उत्तर प्रदेश में भी जेल से चुनाव लड़ने की परंपरा रही है। वर्ष 1996 में मुख्तार अंसारी ने जेल में रहते हुए मऊ विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
यह भी पढ़ें- AAP के दो विधायकों के इस्तीफे पर गरमाई पंजाब की सियासत, अमन अरोड़ा और बलतेज पन्नू ने भाजपा पर साधा निशाना
पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय घोसी सीट से जीते
इसी चुनावी दौर में पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय ने भी जेल में रहते हुए घोसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वह टाडा मामले में जेल में बंद थे। इस चुनाव में कल्पनाथ राय ने मुख्तार अंसारी को हराया था।
इसके अलावा वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने जेल में रहते हुए रामपुर सीट से जीत हासिल की थी। कैराना से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन ने भी जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। बाद में आजम खान को एक मामले में सजा होने के बाद विधानसभा की सदस्यता गंवानी पड़ी।
1.97 लाख वोटों से जीते थे अमृतपाल सिंह
जेल में रहते हुए चुनाव जीतने के सबसे हालिया चर्चित उदाहरण 2024 के लोकसभा चुनाव में सामने आए। पंजाब की खडूर साहिब सीट से वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। वह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद थे। इसके बावजूद उन्होंने 1.97 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
इसी चुनाव में जम्मू-कश्मीर की बारामुला सीट से इंजीनियर राशिद ने भी जेल में रहते हुए जीत दर्ज की। वह आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया। दोनों नेताओं को सांसद के तौर पर शपथ लेने के लिए अदालत से अस्थायी रिहाई की अनुमति मिली थी।
चुनाव लड़ने और वोट डालने के नियम अलग
कानून में जेल में बंद व्यक्ति के चुनाव लड़ने और मतदान करने को लेकर अलग-अलग प्रावधान हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62(5) के तहत जेल में बंद या पुलिस की वैध हिरासत में रहने वाला व्यक्ति सामान्य तौर पर मतदान नहीं कर सकता। हालांकि, निवारक हिरासत में रखे गए व्यक्तियों को इसका अपवाद प्राप्त है।
दूसरी ओर, केवल जेल में बंद होने के आधार पर किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जाता। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को कानून के तहत ऐसी सजा हुई है, जिससे वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है, तो उसके लिए अलग प्रावधान लागू होते हैं।
इस तरह संजीव अरोड़ा की उम्मीदवारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चुनाव में प्रत्याशी की व्यक्तिगत मौजूदगी कितनी जरूरी है और क्या मतदाताओं का समर्थन जेल में बंद उम्मीदवार को भी जीत की दहलीज तक पहुंचा सकता है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।