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    343 साइकोलाॅजिस्ट भर्ती रद होने पर बवाल, 180 चयनित उम्मीदवारों का मामला पहुंचा हाईकोर्ट 

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 09:18 PM (IST)

    बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की 343 साइकोलॉजिस्ट भर्ती विवादों में घिर गई है। 180 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र का इंतजार था, लेकिन सरकार ने पदों को रद ...और पढ़ें

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    प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद सरकार द्वारा इन पदों को रद किए जाने से 180 चयनित उम्मीदवारों में भारी रोष।

    जागरण संवाददाता, मोहाली। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट द्वारा निकाली गई 343 साइकोलाजिस्ट पदों की भर्ती अब विवादों में घिर गई है। लिखित परीक्षा, रिजल्ट और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद सरकार द्वारा इन पदों को रद किए जाने से 180 चयनित उम्मीदवारों में भारी रोष है।

    उम्मीदवारों का कहना है कि वे पूरी तरह से निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे और नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, पंजाब द्वारा पदों को रद्द कर आउटसोर्सिंग के जरिए नई भर्ती की घोषणा कर दी गई। इससे आहत होकर चयनित उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अदालत ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है।

    वहीं, 24 अप्रैल 2025 को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट ने विज्ञापन नंबर 25/10 के तहत 343 साइकोलाजिस्ट पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन की अंतिम तिथि 3 मई 2025 रखी गई और 26 मई 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई।

    परीक्षा से पहले 21 मई को एडमिट कार्ड जारी किए गए, जबकि परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया। दो जून 2025 को परिणाम घोषित किया गया, जिसमें 180 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया। यूनिवर्सिटी ने 18 जून को इनकी सूची जारी कर 23 जून 2025 को गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कालेज, फरीदकोट में दस्तावेज़ सत्यापन कराया।

    इस दौरान प्रत्येक उम्मीदवार से 1000 रुपये शुल्क भी लिया गया। लेकिन 18 दिसंबर 2025 को स्वास्थ्य विभाग, पंजाब ने अचानक इन पदों को रद्द करने और आउटसोर्सिंग के माध्यम से 200 साइकोलाजिस्ट भर्ती करने का आदेश जारी कर दिया।

    इसके खिलाफ 180 चयनित उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 23 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इस फैसले पर स्टे लगा दिया। अब 29 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि चयनित पदों को आखिर क्यों रद्द किया गया।