Punjab Lok Sabha Election 2024: पंजाब में खिलाड़ियों के टीम बदलने से बदली राजनीतिक तस्वीर, AAP और BJP को मिला लाभ
Punjab Lok Sabha Election 2024 पंजाब में इस बार राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। कांग्रेस ने 2019 में लोकसभा की आठ सीटों पर जीत हासिल कर पंजाब में नरेन्द्र मोदी के अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा रोका था। हालांकि वर्ष 2022 तक आते-आते तस्वीर बदलने लगी। वहीं कैप्टन के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस का मजबूत गढ़ पटियाला कांग्रेस के हाथ से निकल गया।

कैलाश नाथ, चंडीगढ़। पंजाब की राजनीतिक तस्वीर वर्ष 2019 से लेकर 2024 के बीच में काफी बदल चुकी है। खिलाड़ियों (नेताओं) के पाला बदलने के कारण कई टीमों (पार्टियों) का संतुलन बिगड़ गया है। इससे अगला मुकाबला जीतने को लेकर उनके सामने चुनौती पैदा हो गई है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ जैसे दिग्गज खिलाड़ी कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा की टीम में शामिल हो चुके हैं। नफा-नुकसान की दृष्टि से देखें तो इन पांच वर्षों में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल को उठाना पड़ा है।
भाजपा और आप को हुआ लाभ
वहीं, भाजपा और आम आदमी पार्टी को लाभ हुआ है। कांग्रेस ने 2019 में लोकसभा की आठ सीटों पर जीत हासिल कर पंजाब में नरेन्द्र मोदी के अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा रोका था। हालांकि, वर्ष 2022 तक आते-आते तस्वीर बदलने लगी। कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने का निर्णय लिया तो कैप्टन ने इस्तीफा देकर खुद को किनारे कर लिया। यहीं से कांग्रेस के खिलाड़ियों का पाला बदलने का क्रम शुरू हो गया।
कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, फतेह जंग बाजवा और मनप्रीत बादल सरीखे नेता भाजपा में शामिल हो गए। कैप्टन के भाजपा में शामिल होने की प्रतिक्रिया भी कांग्रेस में देखने को मिली। कांग्रेस ने कैप्टन की पत्नी और पटियाला की सांसद परनीत कौर को पार्टी से निलंबित कर दिया, जोकि अब भाजपा में शामिल हो गई हैं। संभावना है कि पटियाला से भाजपा की टीम से वे ही मैदान में उतरेंगी। इससे पहले भाजपा ने केवल ढिल्लों को संगरूर उपचुनाव में अपना प्रत्याशी बनाया था। हालांकि वह हार गए थे।
आप का एक प्रयोग सफल, नए की तैयारी
एक पुराना फार्मूला अपनी लकीर को बड़ा करो या दूसरे की लकीर को छोटा करो, आम आदमी पार्टी को खासा रास आया। जालंधर में आप ने कांग्रेस के ही पूर्व विधायक सुशील रिंकू को पार्टी में शामिल कराकर जालंधर लोकसभा सीट के उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया। आप का यह प्रयोग सफल रहा। सुशील रिंकू जीत गए। अब आप ने रिंकू को फिर जालंधर से प्रत्याशी बना दिया है।
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जालंधर की सफलता को देखते हुए आप ने कांग्रेस के बस्सी पठाना से पूर्व विधायक गुरप्रीत सिंह जीपी को पार्टी में शामिल करवा लिया है। पार्टी ने उन्हें फतेहगढ़ साहिब से उम्मीदवार बना दिया है। चब्बेवाल के विधायक राजकुमार चब्बेवाल अब आप में शामिल हो गए हैं। संभावना है कि आप उन्हें होशियारपुर सीट से उतार सकती है।
कांग्रेस के हाथ से निकल गया पटियाला
कैप्टन के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस का मजबूत गढ़ पटियाला कांग्रेस के हाथ से निकल गया। वहीं, जाखड़ और राणा सोढ़ी के जाने से फिरोजपुर सीट पर कांग्रेस को नुकसान हुआ। रही-सही कसर 2023 में जालंधर लोकसभा सीट के उपचुनाव में सुशील रिंकू ने पूरी कर दी। कांग्रेस छोड़कर रिंकू आम आदमी पार्टी से प्रत्याशी बने और वह चुनाव भी जीते। इससे कांग्रेस का जालंधर जैसा मजबूत किला भी ढह गया। हालांकि, कांग्रेस कमजोर नेतृत्व के कारण गुटबाजी का शिकार हो रही है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को वरिष्ठ नेता टीम का कैप्टन स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
इन खिलाड़ियों ने घर वापसी करके राहत की सांस ली
कांग्रेस के पूर्व मंत्री बलबीर सिद्धू, सुंदर शाम अरोड़ा, गुरप्रीत कांगड़, राजकुमार वेरका और केवल ढिल्लों आदि नेता कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में चले गए। हालांकि, बाद में बलबीर सिद्धू, गुरप्रीत कांगड़, राजकुमार वेरका आदि नेताओं ने घर वापसी कर भाजपा को झटका दिया।
शिरोमणि अकाली दल को भी हुआ नुकसान
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मात्र तीन सीटों पर सिमट जाने के कारण राजनीतिक हाशिए पर आए शिअद को भी काफी नुकसान हुआ। होशियारपुर से मोहिंदर कौर जोश, बठिंडा से हिंदू चेहरा सरूप चंद सिंगला व अनुसूचित जाति चेहरा डॉ. चरणजीत सिंह अटवाल जैसे नेताओं ने भाजपा का दामन थामा। वहीं, भाजपा के दरवाजे बंद होते देख किसान आंदोलन के दौरान अमृतसर से भाजपा के पूर्व मंत्री अनिल जोशी ने शिअद की तकड़ी पकड़ ली।
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खिलाड़ियों के टीम बदलने से आहत शिअद को राहत तब मिली, जब उनके पुराने साथी सुखदेव ढींडसा और उनके बेटे परमिंदर ढींडसा पार्टी में वापस आ गए। ढींडसा परिवार ही संगरूर में शिअद की राजनीति की धुरी था। ढींडसा परिवार के दूर होने के कारण संगरूर उपचुनाव में शिअद चौथे स्थान पर चला गया था। अब जागीर कौर भी टीम में वापस आ गई हैं।
बिना बादल के होगा पहला चुनाव
पंजाब की राजनीति के बाबा बोहड़ कहे जाने वाले शिअद के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल का निधन हो गया है। देश की आजादी के बाद पंजाब में बादल की अनुपस्थिति में पहला चुनाव होने जा रहा है। अब टीम की सारी जिम्मेदारी सुखबीर बादल पर आ गई है।
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