ED की जांच के बीच पंजाब सरकार का बड़ा एक्शन, मोहाली के बिल्डर को मिली 40 करोड़ की छूट रद
ED जांच के घेरे में आए मोहाली के व्यावसायिक साइट मामले में पंजाब सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए बिल्डर ...और पढ़ें

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
पंजाब सरकार ने 40 करोड़ रुपये की छूट रद्द की।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बीच फैसला।
कंपनी को बकाया भुगतान के लिए एक माह।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। मोहाली में दिल्ली की कंपनी रेमिगेट बिल्डेस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित व्यावसायिक साइट से जुड़े मामले में पंजाब सरकार ने करीब 40 करोड़ रुपये की छूट रद कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बीच राज्य के आवास एवं शहरी विकास विभाग ने आठ महीने पहले दी गई राहत को वापस लेने का फैसला किया है।
सरकार ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) को बकाया राशि की दोबारा गणना करने के निर्देश दिए हैं। कंपनी को बकाया भुगतान के लिए एक महीने का समय मिलेगा। ऐसा नहीं करने पर साइट का आवंटन रद करने और जमा राशि जब्त करने की कार्रवाई हो सकती है।
आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव विकास गर्ग ने 15 अक्टूबर को 19 पन्नों का आदेश जारी कर गमाडा के अपीलीय प्रशासक के पांच फरवरी 2026 के आदेश को खारिज कर दिया। इसके साथ ही दिसंबर 2025 में संपदा अधिकारी (आवास) की ओर से किस्तों के भुगतान में दी गई रियायत को भी पलट दिया गया है।
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32.50 करोड़ रुपये में आवंटित हुई थी साइट
यह मामला मोहाली के सेक्टर-62 में 1.13 एकड़ के फूड कोर्ट स्थल से जुड़ा है। सितंबर 2015 में नीलामी के माध्यम से यह साइट रेमिगेट बिल्डेस्टेट्स को 32.50 करोड़ रुपये में आवंटित की गई थी। कंपनी ने शुरुआत में कुल कीमत का 20 प्रतिशत जमा कराया था। इसके बाद करीब 19.87 करोड़ रुपये की एक किस्त भी जमा कराई गई।
कंपनी का दावा था कि बार-बार मांग करने के बावजूद गमाडा उसे सभी बाधाओं से मुक्त साइट उपलब्ध नहीं करा सका। दूसरी ओर, बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर प्राधिकरण ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
फरवरी 2026 में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में हुई गमाडा की 34वीं प्राधिकरण बैठक में कथित तौर पर यह माना गया कि साइट बाधाओं से मुक्त नहीं होने के कारण करीब 40 करोड़ रुपये के निर्माण न करने संबंधी शुल्क की मांग उचित नहीं थी। इसी आधार पर कंपनी को राहत दी गई थी। अब राज्य सरकार ने इस फैसले को रद कर दिया है।
ईडी खंगाल रही रिकार्ड
साइट आवंटन और बकाया राशि में छूट का मामला ईडी की जांच के दायरे में है। अगस्त में ईडी के दिल्ली कार्यालय ने गमाडा के तीन अधिकारियों मुख्य अभियंता अजय गर्ग, पूर्व मुख्य अभियंता सुनील कंसल और तत्कालीन भूमि अधिग्रहण अधिकारी हरदीप सिंह को समन जारी कर रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। जांच धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की जा रही है।
पिछले महीने गमाडा कार्यालय में ईडी की तीन दिन तक चली तलाशी के बाद मामला और गंभीर हो गया। एजेंसी ने जांच के दौरान आरोप लगाया था कि बिना बिके भूमि के टुकड़ों के आरक्षित मूल्य में कथित हेरफेर से गमाडा और पंजाब सरकार को करीब 10,000 करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है। जांच में साइट आवंटन, इंजीनियरिंग आकलन और बकाया राशि में दी गई छूट से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
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कंपनी के दावों को नहीं माना
कंपनी ने पुनरीक्षण याचिका में किस्तों के भुगतान की समयसीमा एक दिसंबर 2026 से आगे बढ़ाने, निर्माण अवधि तीन से बढ़ाकर पांच वर्ष करने और निर्माण न करने संबंधी शुल्क, जुर्माने व अन्य वित्तीय देनदारियों में छूट या कटौती की मांग की थी।
हालांकि, पुनरीक्षण प्राधिकारी ने कहा कि कंपनी ने 2016 से किस्तों का भुगतान बंद कर दिया था और वह लगातार बकाया रही। कंपनी ने निर्माण के लिए पर्याप्त पूंजी लगाने और इंजीनियरिंग टीम तैनात करने का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में दस्तावेज, तस्वीरें या खर्च का विवरण प्रस्तुत नहीं किया।
मार्च 2021 में प्लिंथ/डीपीसी स्तर की मंजूरी के बाद शुरू हुआ निर्माण भी बाद में बंद कर दिया गया। कंपनी ने सड़क संपर्क, पानी की आपूर्ति, साइट से गुजरती सीवरेज लाइन और बुनियादी ढांचे में देरी का हवाला देकर राहत मांगी थी। इसके विपरीत, गमाडा की इंजीनियरिंग रिपोर्ट में कहा गया कि आसपास की सड़कों से साइट तक पहुंच उपलब्ध थी।
एक महीने में बकाया चुकाना होगा
विभाग ने गमाडा को निर्देश दिया है कि कंपनी की ओर से जमा कराई गई राशि समायोजित करने के बाद मूल बकाया, लागू ब्याज, दंडात्मक ब्याज और निर्माण न करने संबंधी शुल्क की पूरी गणना की जाए। इसके बाद कंपनी को मदवार विवरण उपलब्ध कराना होगा।
विवरण मिलने के बाद कंपनी को बकाया चुकाने के लिए एक महीने का समय मिलेगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर साइट का आवंटन रद करने और जमा राशि जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। आदेश में सार्वजनिक राजस्व की सुरक्षा और नीलामी में भाग लेने वाली सभी कंपनियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने को छूट रद करने का आधार बताया गया है।
