पंजाब में गर्भवती महिलाओं को घर के पास मिल रही हैं स्वास्थ्य सुविधाएं, 10000 से ज्यादा ने कराया फ्री अल्ट्रासाउंड
पंजाब सरकार ने आम आदमी क्लीनिकों (ए.ए.सी.) के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसूति स्वास्थ्य देखभाल को विकेंद्रित किया है। चार महीनों में लगभग 20, ...और पढ़ें
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आम आदमी क्लीनिकों से गर्भवती महिलाओं को मिली नई जीवन रेखा
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। आने वाली पीढ़ियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने प्रसूति स्वास्थ्य देखभाल को सफलतापूर्वक विकेंद्रित किया है और आम आदमी क्लीनिक (ए.ए.सी.) गर्भवती महिलाओं के लिए नई जीवन रेखा के रूप में उभर रहे हैं। एक विशेष प्रोटोकॉल-आधारित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू करने के मात्र चार महीनों के अंदर सेवाएं हासिल करने वालों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है और हर महीने लगभग 20,000 गर्भवती महिलाएं इन क्लीनिकों में पहुंच रही हैं।
इस पहल की सफलता को साझा करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत पहले ही एक यूनिक रैफरल सिस्टम के माध्यम से 10,000 से अधिक महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रदान की गई हैं। इसके साथ ही लगभग 500 निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को सूचीबद्ध करके राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को विभिन्न स्कैन: जिनकी कीमत आम तौर पर 800 रुपये से 2,000 रुपये के बीच होती है - की सुविधा पूरी तरह मुफ्त दी जा रही है। इस सुविधा से मात्र 120 दिनों के छोटे समय में पंजाबी परिवारों को अनुमानित 1 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में 70 प्रतिशत से कम गर्भवती महिलाओं ने अपना पहला एंटे-नेटल चेक-अप करवाया है और लगभग 60 प्रतिशत से कम ने सिफारिश अनुसार पूरे चार चेक-अप करवा लिए हैं, जबकि राज्य में माताओं की मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 90 रही है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इन आंकड़ों ने राज्य भर में एक व्यापक, पहुंचयोग्य गर्भावस्था देखभाल मॉडल की तुरंत आवश्यकता को उजागर किया।
पंजाब में हर साल लगभग 4.3 लाख प्रसव होते हैं, जिससे माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए जल्दी पता लगाना, नियमित निगरानी और समय पर रैफरल बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। पिछले तीन सालों में, मान सरकार ने 881 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए हैं, जो पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की रीढ़ के रूप में उभरे हैं, जिसमें 4.6 करोड़ से अधिक ओपीडी विजिट और रोजाना लगभग 70,000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इस बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए, सरकार ने लगभग चार महीने पहले ए.ए.सीज़. के माध्यम से एक विस्तृत, प्रोटोकॉल-संचालित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू किया।
इस सुधार के तहत, सभी जरूरी एंटे-नेटल चेक-अप अब आम आदमी क्लीनिकों में उपलब्ध हैं। इनमें एच.आई.वी. और साइफिलिस स्क्रीनिंग, खून के सभी टेस्ट, शुगर, थायरॉइड, हेपेटाइटिस, भ्रूण की दिल की धड़कन, कोलेस्ट्रॉल और हीमोग्लोबिन मूल्यांकन जैसे रूटीन और महत्वपूर्ण टेस्ट शामिल हैं। यदि अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है तो ए.ए.सी. डॉक्टर द्वारा रैफरल स्लिप जारी की जाती है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाएं मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्राप्त कर सकती हैं।
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि, लगभग 5,000 महिलाओं को हर महीने उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के रूप में पहचाना जा रहा है ताकि निरंतर ट्रैकिंग, केंद्रित सहायता और विशेषज्ञ देखभाल के लिए उच्च चिकित्सा सुविधाओं के लिए समय पर रैफरल किया जा सके।
इस सुधार से मरीज के अनुभव में भी काफी सुधार हुआ है। महिलाएं अब गर्भावस्था से संबंधित ज्यादातर टेस्ट अपने घरों के नजदीक ही करवा सकती हैं, जिससे बड़े अस्पतालों में जाना और लंबी कतारों की परेशानी से बचते हुए मिनटों में चिकित्सकीय सलाह ले सकती हैं और बिना किसी वित्तीय बोझ के अल्ट्रासाउंड सेवाओं तक पहुंच कर सकती हैं। जन्म से पहले की पहली जांच से लेकर जन्म के बाद के फॉलो-अप तक, यह पहल तकनीकी, मानक क्लीनिकल प्रोटोकॉल, रैफरल प्रणालियों और कम्युनिटी-स्तरीय सहायता को एकीकृत करके पूरी गर्भावस्था देखभाल को मजबूत बनाती है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कहा कि यह पहल जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी अगुवाई के तहत, पंजाब एक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का निर्माण कर रहा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि हर मां को घर के नजदीक मानक देखभाल मिले। सालाना 4.3 लाख गर्भावस्थाओं के साथ, आम आदमी क्लीनिकों में गर्भावस्था देखभाल सेवाओं का विस्तार एक परिवर्तनकारी कदम है और भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नया मानक स्थापित कर रहा है।”
सरकार का मानना है कि यह पहल पिछले कुछ सालों में माताओं और बच्चे के स्वास्थ्य में पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी महिला भौगोलिक स्थिति, आय या जागरूकता की कमी के कारण इस लाभ से वंचित न रहे। इसके साथ ही राज्य भर में माताओं और नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य परिणामों में लगातार सुधार किया जा रहा है।

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