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पंजाब में बिजली सब्सिडी के 11,109 करोड़ बकाया, 5,500 करोड़ के बैंक ऋण पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Published: Fri, 16 Oct 2026 03:03 PM (GMT+05:30)

पंजाब में बिजली सब्सिडी और सरकारी विभागों के बकाये को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब ...और पढ़ें

ये प्रतीकात्म्क तस्वीर है।

ये प्रतीकात्म्क तस्वीर है।

HighLights

  1. पंजाब में 11,109 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी लंबित।

  2. सरकारी विभागों पर 2,382 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया।

  3. हाईकोर्ट ने PSPCL के बढ़ते कर्ज पर मुख्य सचिव से जवाब मांगा।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब में बिजली सब्सिडी के भुगतान में देरी और सरकारी विभागों पर बिजली बिलों की भारी देनदारी का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर जसकिरत सिंह व अन्य ने जनहित याचिका दायर की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंजाब सरकार सब्सिडी का भुगतान समय पर नहीं कर रही और सरकारी विभागों के बकाया बिलों की वसूली में देरी से बिजली निगम पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है।

मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने सरकार को बकाया सब्सिडी जारी करने और विभागों के बिजली बिलों का भुगतान करने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही बिजली निगम से पुराने बकाये की वसूली के प्रभावी कदम उठाने और नया कर्ज लेने से पहले वास्तविक वित्तीय जरूरत का आकलन करने को कहा है।

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लंबित सब्सिडी का उठा मामला

याचिका के अनुसार, पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग ने छह मार्च 2026 के टैरिफ आदेश में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली सब्सिडी का आकलन किया था। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक पुराने बकाये सहित 11,109.70 करोड़ रुपये की सब्सिडी लंबित थी।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में बिजली सब्सिडी के लिए 15,550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। याचिका में कहा गया है कि बजट में राशि का प्रावधान और उसका वास्तविक भुगतान अलग-अलग बातें हैं। भुगतान में देरी से बिजली निगम को परिचालन जरूरतों के लिए ब्याज पर कर्ज लेना पड़ सकता है।

विभागों पर भारी बिजली बिल बकाया

याचिका में दावा है कि जुलाई 2026 के अंत तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर बिजली निगम के 2,382.40 करोड़ रुपये बकाया थे। इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक निगम की व्यापारिक वसूली योग्य राशि 8,142.47 करोड़ रुपये थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सरकारी विभागों के समय पर बिल न चुकाने से निगम को वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज पर निर्भर होना पड़ता है। इससे जुड़ा ब्याज बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा सकता है।

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बगैर बकाये वसूली कर्ज पर आपत्ति

याचिका में बिजली निगम की वित्तीय स्थिति और कर्ज प्रक्रिया का पूरा ब्योरा मांगा गया है। इसमें जून 2026 में 10,000 करोड़ रुपये के बांड जारी करने की प्रक्रिया और बाद में 5,500 करोड़ रुपये के बैंक ऋण की व्यवस्था का भी उल्लेख है।

याचिकाकर्ताओं ने देनदारियों, बकाया सब्सिडी, ऋण की जरूरत, ब्याज दर और उधार राशि के उपयोग का रिकॉर्ड पेश कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैध वित्तीय जरूरतों के लिए कर्ज लेने पर आपत्ति नहीं है; आपत्ति सरकारी बकाये की वसूली और सब्सिडी भुगतान सुनिश्चित किए बिना अतिरिक्त कर्ज लेने से बढ़ने वाले बोझ पर है।

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