Punjab Assembly Session: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, ऑडिट होगा गुरु गोबिंद सिंह रिफाइनरी का सीएसआर फंड
Punjab Assembly Session पंजाब सरकार (Punjab Government) ने बठिंडा स्थित गुरु गोबिंद सिंह रिफाइनरी द्वारा पिछले 5 वर्षों में दिए गए सीएसआर फंड का ऑडिट करवाने का आदेश दिया है। यह आश्वासन उद्योग मंत्री ने तलवंडी साबो की विधायक प्रोफेसर बलजिंदर कौर को दिया है। विधायक ने शून्य काल में यह मामला उठाया था और पूछा था कि अब तक कितने पैसे सीएसआर फंड के जरिए मिले हैं।

इंदरप्रीत सिंह, चंडीगढ़। Punjab Assembly Session: बठिंडा में स्थित गुरु गोबिंद सिंह रिफायनरी की ओर से पिछले 5 सालों में दिए गए सीएसआर फंड का ऑडिट करवाया जाएगा।
यह आश्वासन उद्योग मंत्री ने तलवंडी साबो की विधायक प्रोफेसर बलजिंदर कौर को देते हुए कहा है कि सरकार आज ही इसके आदेश जारी कर रही है।
पिछले 5 सालों में आया 180 करोड़ का फंड
विधायक ने यह मामला आज शून्य काल में उठाया और विभाग से पूछा कि अब तक कितने पैसे सीएसआर फंड के जरिए उन्हें मिले हैं। मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि पिछले 5 सालों में 180 करोड़ रुपये का फंड आया है, जिसमें से 153 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
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विधायक ने इस खर्च किए गए पैसे पर ऐतराज जताया और कहा कि सिर्फ झूले लगाकर इस फंड को खर्च किया गया बताया गया है। इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार पिछले 5 सालों का ऑडिट करवाएगी।
विधायक ने यह भी कहा कि रिफाइनरी की ओर से स्थानीय ट्रांसपोर्टर को दबाया जा रहा है। मंत्री यह आश्वासन दें कि जिस क्षेत्र में कोई बड़ी इंडस्ट्री लगती है, उसमें वहां के स्थानीय लोगों को ही काम दिया जाए।
विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर हुआ हंगामा
बता दें कि पंजाब विधानसभा में आज पार्टी फंड के नाम पर पैसे लेने के पावरकॉम के अधिकारियों के आरोप को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर हंगामा हुआ और बात यहां तक भी आई कि इसकी जांच हाउस कमेटी या जुडिशल कमेटी बनाकर की जाए।
लेकिन अंततः लंबी बहस के बाद स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने यह कहकर मामले को टाल दिया कि विधानसभा में पहले से ही कई कमेटियां बनी हुई है, जो सरकार के कामकाज की निगरानी करती है। उन्होंने विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा से अपनी बात पिटीशन कमेटी के सामने रखने की बात कह दी।
काबिले गौर है कि शून्य काल में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि पावरकॉम के एक संगठन ने पार्टी फंड के नाम पर ₹50000 देने की बात अपने अधीनस्थ अधिकारियों से कही थी, जिसकी शिकायत पर विजिलेंस ने केस भी दर्ज किया है। उन्होंने मांग की इस केस की जांच विधानसभा की हाउस कमेटी बना कर की जाए या फिर न्यायिक जांच करवाई जाए।
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