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    पेंट केवल इमारतों को सुंदर बनाने के लिए नहीं, अस्पतालों में संक्रमण भी रोकेगा, PU वैज्ञानिकों ने किया ऐसा कमाल, केंद्र सरकार से मंजूरी

    By Sohan Lal Edited By: Sohan Lal
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 07:27 PM (IST)

    पंजाब विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक विशेष पेंट एडिटिव विकसित किया है, जिसे केंद्र सरकार से पेटेंट मिला है। यह अस्पतालों में संक्रमण कम करने में स ...और पढ़ें

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    मोहित पांडे्य, चंडीगढ़। पेंट केवल इमारतों को सुंदर बनाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन बचाने में भी सहायक होना चाहिए। ऐसा ही कर दिखाया है पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के वैज्ञानिकों ने। उन्होंने एक विशेष पेंट एडिटिव विकसित किया है, जो अस्पतालों में होने वाले संक्रमणों को कम करने में मदद कर सकता है। इस पेंट को केंद्र सरकार की ओर से पेटेंट प्रदान किया गया।

    यह महत्वपूर्ण खोज केमिकल इंजीनियरिंग एवं नैनोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर गौरव वर्मा के नेतृत्व में कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए सहयोगात्मक शोध का परिणाम है। शोध दल में बायोफिज़िक्स विभाग के प्रोफेसर अवनीत सैनी, डॉ. शुभी जोशी और एमएससी की छात्रा दीक्षा शर्मा भी शामिल हैं।

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    यह पेंट एडिटिव सतहों पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करता है, जिससे अस्पतालों की दीवारें, बिस्तर और फर्नीचर अधिक सुरक्षित बनते हैं। विशेष रूप से यह सामग्री गैर-विषैली है और हवा या आसपास के वातावरण में नहीं घुलती, जिससे यह इनडोर उपयोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

    यह पेटेंट प्राप्त पेंट तकनीक अस्पतालों और क्लीनिकों में व्यापक रूप से उपयोग की जा सकती है, जिससे संक्रमण कम होंगे और रोगियों की सुरक्षा बढ़ेगी। इस नवाचार की परिकल्पना कोविड-19 के वर्षों के दौरान हुई, जब विशेष रूप से 2021–22 की डेल्टा लहर में अस्पतालों में होने वाले संक्रमणों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।

    ये संक्रमण अक्सर दीवारों, बिस्तरों और फर्नीचर जैसी बार-बार छुई जाने वाली सतहों के माध्यम से फैलते थे और ब्लैक फंगस जैसी गंभीर जटिलताओं से भी जुड़े थे। इस नवाचार की कहानी 2018 में शुरू हुई, जब फूड माइक्रोबायोलॉजिस्ट शुभी जोशी ने पीएचडी के लिए प्रोफेसर वर्मा से संपर्क किया।

    पंजाब विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में टॉप करने के बावजूद उन्हें अपने विषय में दाखिला नहीं मिल सका। इसके बाद प्रोफेसर वर्मा ने उन्हें अपनी प्रयोगशाला में स्थान दिया और नैनोमैटीरियल जैसे अत्यंत सूक्ष्म पदार्थों से जुड़े एक चुनौतीपूर्ण शोध विषय पर काम सौंपा।

    महामारी के दौरान शोध दल ने कोविड सुरक्षा नियमों और शारीरिक दूरी का पालन करते हुए प्रयोगशाला में अपना कार्य जारी रखा। उनके निरंतर प्रयासों से एंटीबैक्टीरियल पेंट एडिटिव का विकास हुआ, जिसे 2022 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वर्तमान में डॉ. शुभी जोशी आईसीएमआर वूमन साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत हैं और पीयू की शोध टीम के साथ सहयोग जारी रखे हुए हैं।