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चंडीगढ़ PGI में हुए प्राइवेट ग्रांट सेल घोटाले के दो आरोपितों को कोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Sat, 03 Jan 2026 07:33 PM (IST)

चंडीगढ़ पीजीआई के 1.14 करोड़ रुपये के प्राइवेट ग्रांट सेल घोटाले में दो आरोपितों सुनील कुमार और गगनप्रीत सिंह की ...और पढ़ें

गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली थी।

गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली थी।

HighLights

  1. 1.14 करोड़ रुपये के गबन का आरोप

  2. गरीब मरीजों की सहायता राशि हड़पने का मामला

  3. छह कर्मचारियों समेत आठ आरोपित

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पीजीआइ में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली सरकारी ग्रांट में 1.14 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल दो आरोपित सुनील कुमार और गगनप्रीत सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी सीबीआई की विशेष अदालत ने खारिज कर दी है।

सीबीआई ने पिछले महीने पीजीआई के छह कर्मचारियों समेत आठ आरोपितों के खिलाफ आइपीसी की धारा 406, 409, 420, 471, 120 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

एफआईआर में सुनील कुमार और गगनप्रीत का भी नाम है। सुनील पीजीआई में मेडिकल रिकाॅर्ड क्लर्क है जबकि गगनप्रीत प्राइवेट ग्रांट सेल का कर्मचारी है। सीबीआई ने पीजीआई प्रशासन की ओर से मिली शिकायत के आधार पर जांच की थी। जांच के दौरान पता चला कि पीजीआई प्राइवेट ग्रांट सेल में कई गड़बड़ियां की गई थी।

यह सेल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, राष्ट्रीय आरोग्य निधि, हंस कल्चर सोसायटी और अन्य सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं से मिलने वाली ग्रांट के प्रबंधन का काम करता है। इसी सेल में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को वित्तिय सहायता और दवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। आरोपितों ने मिलकर गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली थी।


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