सात राज्यों में फैला अवैध फार्मा नेटवर्क, पंजाब में एनसीबी की बड़ी कार्रवाई, 20.10 करोड़ की संपत्तियां सीज
एनसीबी ने सात राज्यों में फैले अवैध दवा नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मोहाली में 20.10 करोड़ रुपये की ...और पढ़ें

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
एनसीबी ने 20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज कीं।
अवैध फार्मा नेटवर्क सात राज्यों में फैला हुआ था।
मोहाली में औद्योगिक प्लाट, व्यावसायिक इकाइयां जब्त।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब सहित सात राज्यों में फैले फार्मास्युटिकल दवाओं की अवैध सप्लाई और डायवर्जन के मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 20.10 करोड़ रुपये की 25 संपत्तियां फ्रीज कर दी हैं। इनमें अधिकतर संपत्तियां पंजाब के मोहाली जिले में स्थित हैं। इनमें औद्योगिक प्लाट, व्यावसायिक इकाइयां, शाप-कम आफिस और अपार्टमेंट शामिल हैं। ये संपत्तियां आरोपितों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर हैं।
एनसीबी के अनुसार, सक्षम प्राधिकरण ने स्मगलर्स एंड फारेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (फारफीचर आफ प्रापर्टी) एक्ट, 1976 और एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ (2) के तहत संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश को मंजूरी दे दी।
अब इन संपत्तियों को पूर्व अनुमति के बिना बेचा, हस्तांतरित या किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। जांच में सामने आया कि आरोपित अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई इन संपत्तियों के लिए आय के वैध स्रोत साबित नहीं कर सके।
यह भी पढ़ें- मानसा में दलजीत की मौत मामले में हरसिमरत बादल ने SSP की लोकसभा में की शिकायत, विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया
मोहाली में फ्रीज की गई संपत्तियां
फ्रीज की गई संपत्तियां मोहाली के गिल्को इंडस्ट्रियल पार्क, मोहाली सिटी सेंटर-3, मोहाली सिटी सेंटर वाक, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2, क्वीनस्टाउन और जेएलपीएल में स्थित हैं। इस मामले में अंबाला कैंट के एक ही परिवार के तीन सदस्य कोनिक गोयल, मानिक गोयल और उनके पिता परशोत्तम लाल गोयल फरार हैं। एनसीबी के अनुसार, वे समन और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद जांच में शामिल नहीं हुए।
सुप्रीम कोर्ट भी उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर चुका है। इस मामले की शुरुआत 7 फरवरी 2025 को हुई थी, जब एनसीबी ने अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल टैबलेट बरामद की थीं। दवाओं की पैकेजिंग पर हरिद्वार की एक कंपनी को निर्माता और देहरादून की एक कंपनी को मार्केटिंग फर्म बताया गया था।
पड़ोसी राज्यों में फैला नेटवर्क
जांच में पता चला कि मार्केटिंग कंपनी का वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। इसके बाद गठित विशेष जांच टीम ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सक्रिय फार्मास्युटिकल कंपनियों के नेटवर्क का पता लगाया।
आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिये दवाओं को ऐसी फर्जी और अस्तित्वहीन कंपनियों के नाम पर भेजा जाता था, जहां से उन्हें अवैध रूप से बाजार में खपाया जाता था। यह नेटवर्क पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।
यह भी पढ़ें- हवारा को पंजाब की जेल में भेजने से विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा असर! IB की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
दो इकाइयों से कच्चा माल बरामद
हिमाचल प्रदेश के काला अंब में डिजिटल विजन और वेलिंटन हेल्थकेयर की दो इकाइयों में बड़ी मात्रा में साइकोट्रापिक दवाएं और उनका कच्चा माल बरामद किया गया। एनसीबी अब तक करीब 34 लाख साइकोट्रापिक टैबलेट, कोडीन आधारित कफ सिरप की 10.57 लाख बोतलें, ट्रामाडोल के 50 हजार एम्प्यूल, मिडाजोलम की 5,000 शीशियां और करीब 2,200 किलोग्राम साइकोट्रापिक पाउडर बरामद कर चुकी है।
इसमें कच्चा माल और तैयार फार्मूलेशन भी शामिल हैं। मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एनसीबी की वित्तीय जांच में सामने आया कि अवैध रूप से बेची गई दवाओं से हासिल रकम को जांच के दायरे में आई कंपनियों के बैंक खातों के जरिये अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया।
एजेंसी अब दवाओं की सप्लाई चेन के साथ-साथ पैसों के लेनदेन की भी जांच कर रही है। इसका उद्देश्य दवा निर्माता, वितरक, नेटवर्क संचालक, फर्जी कंपनियों और वित्तीय मददगारों तक पहुंचना है। एनसीबी ने स्पष्ट किया है कि फ्रीज की गई संपत्तियों को एनडीपीएस एक्ट के अध्याय पांच-ए के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।